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डिग्री से ज्यादा कौशल, रुचि को व्यवसाय से जोड़ें – डॉ. दीपक शिकारपुर 

डिग्री से ज्यादा कौशल, रुचि को व्यवसाय से जोड़ें – डॉ. दीपक शिकारपुर 

अलार्ड यूनिवर्सिटी द्वारा ‘दीक्षारंभ 2026’ कार्यक्रम उत्साहपूर्वक संपन्न

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान:पुणे महाराष्ट्र

पुणे,, विद्यार्थियों को केवल डिग्री हासिल करने पर ध्यान न देकर अपनी रुचि का क्षेत्र पहचानकर उसे व्यवसाय से जोड़ना चाहिए। रुचि और व्यवसाय का सही तालमेल बिठाया जाए तो उत्कृष्टता अपने आप प्राप्त होती है, यह सलाह वरिष्ठ आईटी विशेषज्ञ डॉ. दीपक शिकारपुर ने विद्यार्थीयों को दी।

अलार्ड यूनिवर्सिटी पुणे की ओर से नए प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित ‘दीक्षारंभ २०२६’ कार्यक्रम में वे मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम अलार्ड यूनिवर्सिटी पुणे के संस्थापक अध्यक्ष एवं कुलाधिपति डॉ. एल. आर. यादव के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर वोडाफोन शेअर्ड सर्विसेज इंडिया के जनरल मैनेजर डॉ. मिलिंद कौळगीकर, एल्गोवर्क्स के वाइस प्रेसिडेंट आशीष बांका, ‘सकाल’ महाराष्ट्र एवं गोवा के चीफ मैनेजर श्यामसुंदर माडेवार, अलार्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सोहन चितलांगे, कुलसचिव चंद्रशेखर जाजू आदि मान्यवर उपस्थित थे।

इस अवसर पर डॉ. दीपक शिकारपुर ने आईटी क्षेत्र के अपने अनुभवों की यादें साझा करते हुए गायक शंकर महादेवन के करियर का उदाहरण दिया। 1987 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने वाले महादेवन ने आईटी क्षेत्र में न जाकर संगीत को चुना और उसमें सफलता हासिल की। इससे विद्यार्थियों को समाज की अपेक्षाओं के बजाय अपनी रुचि और क्षमताओं को पहचानना महत्वपूर्ण है। ‘पी प्लस पी इक्वल्स ई’ को शंकर महादेवन के करियर का नियम बताते हुए उन्होंने ‘पैशन प्लस प्रोफेशन इक्वल्स एक्सीलेंस’ का सूत्र प्रस्तुत किया। लता मंगेशकर और सचिन तेंदुलकर के उदाहरणों से भी उन्होंने अपनी रुचि के क्षेत्र में निरंतर काम करने के महत्व को स्पष्ट किया।

डॉ. मिलिंद कौळगीकर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा तकनीक तेजी से बदल रही है, इसलिए विद्यार्थियों को लगातार नई तकनीक सीखते हुए व्यावहारिक और रचनात्मक बने रहना चाहिए। मोबाइल और रील्स पर समय गंवाने के बजाय उसके पीछे की रचनात्मकता पर विचार करना चाहिए। डेटा क्षेत्र में अवसर और चुनौतियां बढ़ रही हैं, इसलिए विद्यार्थियों को अपनी कमियों के बजाय अपनी ताकतों पर ध्यान केंद्रित कर उसमें विशेषज्ञता हासिल करनी चाहिए।

आशीष बांका ने कहा कि खुद की कमाई पर खड़े होने की जिद बचपन में दादी द्वारा दी गई सीख से उनमें पैदा हुई। जीवन में खुश रहना, तुलना और प्रतिस्पर्धा के चक्र में न फंसकर निरंतर प्रयास करना, सही मार्गदर्शक का साथ लेना और माता-पिता का सम्मान करना आवश्यक है। असफलता से डरें नहीं; हर असफलता से खुद को नए सिरे से पहचानने और सीखने का अवसर मिलता है। 2011 में सरकारी नौकरी छोड़कर एचआर क्षेत्र में प्रवेश करते समय लगातार चार महीनों में 48 साक्षात्कार दिए। आखिरकार कोलकाता में सात हजार रुपये की पहली नौकरी मिली। उसके बाद कड़ी मेहनत के बल पर कतर एयरवेज, रिलायंस, टाटा और ओपनएआई से जुड़ी वैश्विक कंपनियों में काम किया। उन्होंने यह प्रेरणादायी संदेश दिया कि मेहनत के बिना सफलता नहीं मिलती।

डॉ. सोहन चितलांगे ने कहा रि हमारा विश्वविद्यालय ‘एटीट्यूड, लीडरशिप, अलर्टनेस, रेडीनेस और डेडिकेशन’ इन पांच स्तंभों पर कार्य कर रहा है। प्रत्येक विद्यार्थी को अनुसंधान को महत्व देना चाहिए। अनुसंधान ही हमारी प्रगति का अगला कदम है, जबकि नेटवर्किंग ही सच्ची सफलता की कुंजी है। जीवन में सफल होने के लिए अनुशासन, अथक परिश्रम, सक्रिय भागीदारी और दूरदृष्टि जैसे गुणों को अपनाना आवश्यक है। इन गुणों को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लेने पर प्रत्येक विद्यार्थी अपने लक्ष्य की ओर सफलतापूर्वक बढ़ सकता है। कार्यक्रम का संचालन प्रभंजन नलावडे ने किया। प्रा. डॉ. मनीषा भेंडे ने प्रस्तावना प्रस्तुत की, जबकि प्रा. गणेश शितोले ने धन्यवाद किया।

विद्यार्थी बड़े सपने देखें

विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने चाहिए; लेकिन सपनों के साथ-साथ अमल भी आवश्यक है। डिग्री करियर की केवल शुरुआत है; संवाद कौशल, तकनीकी कौशल और विदेशी भाषाओं का ज्ञान भविष्य के करियर के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा. 

– डॉ. दीपक शिकारपुर, वरिष्ठ आईटी विशेषज्ञ.

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