
जनसांख्यिकीय बदलाव एवं लोक प्रशासन पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में जुटे देश भर के शिक्षाविद्
उप मुख्यमंत्री ने युवाओं को देशविरोधी भ्रमों से जागरूक रहने का दिया संदेश
पद पर पहुँचने के बाद निश्चिंत होना नहीं, समर्पित सेवा ही राष्ट्र-निर्माण का आधार – उप मुख्यमंत्री
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान रीवा मध्य प्रदेश
रीवा: रीवा शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय रीवा के तत्वावधान में “भारत में जनसांख्यिकीय बदलाव एवं लोक प्रशासन” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल सम्मिलित हुए। इस अवसर पर देश एवं प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, प्रशासनिक विशेषज्ञों, प्राध्यापकों और शोधार्थियों ने सहभागिता की। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने प्रशासनिक जवाबदेही और राष्ट्र-निर्माण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बड़े पदों पर आसीन होने के बाद अधिकारियों को निश्चिंत होकर बैठने का अधिकार नहीं है। जब प्रशासनिक मशीनरी में शिथिलता आती है, तब देश के विकास की गति धीमी पड़ती है। यही कारण है कि हमें सतत कर्मयोगी की तरह कार्य करना होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की कार्य-साधना का उदाहरण देते हुए श्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री जी पिछले 25 वर्षों से लगातार सार्वजनिक जीवन में रहते हुए, मात्र 4-5 घंटे की नींद लेकर निरंतर जनता की सेवा में समर्पित हैं। ‘तन समर्पित, मन समर्पित और यह जीवन समर्पित… चाहता हूँ देश की धरती, मैं तुझे कुछ और दूँ’ की इसी उच्च भावना के साथ आज देश में कार्य हो रहा है।” भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और युवा शक्ति का उल्लेख करते हुए उप मुख्यमंत्री ने आगाह किया कि विश्व पटल पर भारत के बढ़ते प्रभुत्व से कई ताकतें असहज हैं। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा को बाधित करने के लिए हमारे देश के युवाओं को ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनाकर भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है। विदेशों से ऐसी ताकतें सक्रिय हैं जो अनर्गल बातें फैलाकर जारी विकास कार्यों में रुकावट डालना चाहती हैं, ताकि वैश्विक स्तर पर भारत उनके सामने चुनौती न बन सके। उन्होंने आह्वान किया कि देश को अखंड और सशक्त बनाने के लिए युवाओं को जागरूक, संस्कारी और समझदार बनना होगा तथा विकास मंथन में अपनी सक्रिय सहभागिता निभानी होगी।
उप मुख्यमंत्री ने सेमिनार के विषय की सराहना करते हुए कहा कि जनसांख्यिकीय बदलावों को ध्यान में रखकर बनाई गई लोक नीतियाँ ही देश का भविष्य तय करेंगी। उन्होंने उपस्थित विशेषज्ञों एवं विद्वानों से स्वास्थ्य तथा अन्य प्रशासनिक विभागों के लिए व्यावहारिक सुझाव माँगे, ताकि उन्हें शासन की भावी नीतियों में शामिल किया जा सके। अंत में उन्होंने छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त कर एक आदर्श नागरिक बनने और देश के विकास में अमूल्य योगदान देने की शुभकामनाएँ दीं। संगोष्ठी के तकनीकी सत्र में देश भर से आए प्राध्यापकों, प्रतिभागियों एवं शोधार्थियों ने ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’, युवा श्रमबल का प्रभावी नियोजन, स्वास्थ्य प्रशासन तथा लोक नीतियों में आवश्यक बदलाव जैसे समसामयिक विषयों पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। एमिनार में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. विभा श्रीवास्तव ने अपने अध्यक्षीय भाषण प्रस्तुत किए। उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. एम.एम. द्विवेदी द्वारा स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रीय संगोष्ठी का संचालन महाविद्यालय के संयोजक डॉ. अमरजीत कुमार सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. एम.एम. द्विवेदी, प्रो.कमलाकर सिंह, श्री डी.पी. तिवारी, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ओ.पी. रावत सहित विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थी एवं प्राध्यापकगण तथा छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

