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चाकण क्षेत्र की कचरा समस्या का निकलेगा स्थायी समाधान, 36.50 एकड़ में बनेगा PMRDA का ठोस कचरा प्रकल्प

चाकण क्षेत्र की कचरा समस्या का निकलेगा स्थायी समाधान, 36.50 एकड़ में बनेगा PMRDA का ठोस कचरा प्रकल्प

 

▪️ MIDC उपलब्ध कराएगा जमीन, PMRDA करेगा परियोजना का निर्माण

▪️ चाकण-राजगुरुनगर नगर परिषद समेत 17 ग्राम पंचायतों को मिलेगा लाभ

▪️ अगले 30 वर्षों की आबादी को ध्यान में रखकर होगी परियोजना की क्षमता तय

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान पुणे महाराष्ट्र

पुणे, : चाकण औद्योगिक क्षेत्र (MIDC) और आसपास के इलाकों में पिछले 13 वर्षों से लंबित ठोस कचरा प्रबंधन की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। चाकण और राजगुरुनगर नगर परिषद समेत आसपास की 17 ग्राम पंचायतों सहित कुल 19 स्थानीय निकायों के लिए पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (PMRDA) द्वारा केंद्रीय ठोस कचरा प्रसंस्करण परियोजना स्थापित की जाएगी।

 

इस परियोजना के लिए चाकण MIDC क्षेत्र के प्वाइंट नंबर-4 पर ESR के पास स्थित 36.50 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। राज्य सरकार के निर्देशानुसार MIDC परियोजना के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध कराएगा, जबकि PMRDA द्वारा केंद्रीय ठोस कचरा प्रसंस्करण केंद्र का निर्माण किया जाएगा।

 

बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार के कारण चाकण एवं खेड क्षेत्र में ठोस कचरा प्रबंधन की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही थी। इसी को देखते हुए PMRDA के आकुर्डी स्थित मुख्यालय में 17 गांवों के सरपंच, प्रशासक, ग्राम विकास अधिकारी, MIDC अधिकारियों और नगर परिषदों के मुख्याधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

 

बैठक में महानगर आयुक्त डॉ. अभिजीत चौधरी, जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी, अतिरिक्त महानगर आयुक्त के. मंजुलक्ष्मी और खेड-आळंदी के विधायक बाबाजी काले की मौजूदगी में प्रस्तावित परियोजना की कार्यप्रणाली और स्थानीय निकायों की भागीदारी को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

 

प्रस्तावित कचरा प्रसंस्करण केंद्र से सभी 19 शहर और गांव 20 किलोमीटर के दायरे में होंगे। इनमें अधिकांश स्थानों की दूरी 3 से 18 किलोमीटर के बीच है। इससे कचरे के परिवहन में सुविधा होगी।

 

संबंधित नगर परिषदों और ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र से कचरा एकत्र कर उसका 100 प्रतिशत पृथक्करण करना होगा और इसके बाद उसे केंद्रीय प्रसंस्करण परियोजना तक पहुंचाना होगा।

 

परियोजना की क्षमता अगले 30 वर्षों की संभावित जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखकर निर्धारित की जाएगी। इसके लिए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 350 ग्राम कचरा उत्पादन का अनुमान आधार बनाया गया है। कचरा प्रसंस्करण के लिए ग्राम पंचायतों को प्रति टन निर्धारित टिपिंग फीस का भुगतान करना होगा। परियोजना में शामिल होने के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों को विधिवत प्रस्ताव पारित करना आवश्यक होगा।

 

कचरा परिवहन के लिए 15वें वित्त आयोग, स्थानीय निधि या CSR फंड से वाहनों की व्यवस्था करने की योजना है। जिन ग्राम पंचायतों के लिए अपने फंड से कचरा परिवहन वाहन खरीदना संभव नहीं है, उन्हें CSR फंड के माध्यम से वाहन उपलब्ध कराने में सहयोग किया जाएगा।

 

जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने कहा कि केंद्रीय परियोजना से ग्राम पंचायतों पर कचरा प्रबंधन का बड़ा बोझ कम होगा। उन्होंने अधिक से अधिक ग्राम पंचायतों से इस व्यवस्था में शामिल होने और आवश्यक प्रस्ताव पारित करने का आह्वान किया।

 

विधायक बाबाजी काले ने कहा कि चाकण और खेड MIDC क्षेत्र में कचरा प्रबंधन की समस्या पिछले कई वर्षों से गंभीर बनी हुई थी। अब इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उन्होंने स्थानीय निकायों से सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की।

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