
हाय राईज रिटेनिंग वॉल’ के नई पद्धति को पेटेंट
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे,: ऊंची इमारतों के कंस्ट्रक्शन में ज़मीन के प्रेशर को कंट्रोल करने और कंस्ट्रक्शन की सेफ्टी बढ़ाने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जाने वाली ‘हाय राईज रिटेनिंग वॉल अँड अ मेथड ऑफ कन्स्ट्रक्शन ऑफ द सेम’ इस अभिनव संकल्पना को भारत सरकार के पेटेंट ऑफिस से पेटंट मंजूर हुआ है. इस शोध के पेटेंट धारक के रूप में मल्हार विकास पाटील और वैशाली विकास पाटील का नाम दर्ज किया गया है.
भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा जारी प्रमाणपत्र के अनुसार, इस शोध के लिए पेटेंट क्रमांक 600147 प्रदान किया गया है. पेटेंट अधिनियम के नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद 21 अगस्त 2026 को इस पेटेंट को मंजूरी दी गई.
ऊंची इमारतों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण संकल्पना
‘ रिटेनिंग वॉल ’ यानी मिट्टी, भराव अथवा जमीन के दबाव को नियंत्रित करने के लिए बनाई जाने वाली संरचना. ऊंची इमारतों, ढलान वाली जमीन, गहरी नींव, बेसमेंट तथा विभिन्न प्रकार की कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में ऐसी संरचनाओं का विशेष महत्व होता है. विशेष रूप से बढ़ते शहरीकरण के कारण सीमित स्थान में ऊंची इमारतों का निर्माण बढ़ रहा है. ऐसे में जमीन की स्थिरता और कंस्ट्रक्शन की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बन गए हैं.
इसी पार्श्वभूमी में ‘हाय राईज रिटेनिंग वॉल ’ और उसके निर्माण की पद्धति से संबंधित इस शोध को मिला पेटेंट निर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पेटेंट मिलने से इस विशिष्ट संकल्पना और इसकी निर्माण पद्धति को बौद्धिक संपदा संरक्षण प्राप्त हुआ है.
20 वर्षों के लिए पेटेंट संरक्षण
पेटेंट प्रमाण पत्र में दर्ज जानकारी के अनुसार, इस शोध के लिए पेटेंट की अवधि 5 अगस्त 2023 से 20 वर्ष की है. पेटेंट मंजूर होने के बाद संबंधित पेटेंट धारकों को इस शोध के उपयोग के संबंध में पेटेंट कानून के तहत प्राप्त अधिकार हासिल हो गए हैं. ऐसे में भविष्य में इस तकनीक के निर्माण क्षेत्र में उपयोग, विकास अथवा व्यावसायिक विस्तार के लिए इस पेटेंट का महत्व बढ़ सकता है.


