63 वर्षीय महिला के अवयवदान से तीन लोगों को मिला नया जीवन
नोबल हॉस्पिटल्स अँड रिसर्च सेंटर में अवयवदान
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे, : मानवता और सामाजिक प्रतिबद्धता की प्रेरणादायी मिसाल पेश करते हुए पुणे की एक 63 वर्षीय ब्रेन-डेड महिला के परिवार ने अवयवदान की सहमति दी. उनके इस निर्णय से तीन मरीजों को नया जीवन मिला.
लंबे समय से अनियंत्रित उच्च रक्तचाप के कारण हुए मस्तिष्क में रक्तस्राव (आईसी ब्लीड) के बाद उन्हें 17 अगस्त को नोबल हॉस्पिटल्स अँड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था. 21 अगस्त 2026 को उन्हें ब्रेन-डेड घोषित किया गया. उनके परिवार की अवयवदान के लिए सहमति के बाद उनके दोनों किडनी और लिवर निकालने की सर्जरी (ऑर्गन रिट्रीवल) की गई.
नोबल हॉस्पिटल्स अँड रिसर्च सेंटर के समूह कार्यकारी अधिकारी डॉ. संजय पठारे ने बताया की,यकृत का प्रत्यारोपण पुणे के 55 वर्षीय पुरुष मरीज पर किया गया. वे लिवर की अंतिम अवस्था की बीमारी से पीड़ित थे. वहीं, एक किडनी का प्रत्यारोपण बेंगलुरु के 49 वर्षीय दुकानदार पर किया गया, जो लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे.
नोबल हॉस्पिटल में दोनों प्रत्यारोपण सर्जरी 22 अगस्त को सफलतापूर्वक की गईं, जबकि दूसरी किडनी ट्रांसप्लांट के लिए पुणे के दूसरे हॉस्पिटल में भेज दी गई.
किडनी प्रत्यारोपणाच्या टीम में मूत्रपिंड प्रत्यारोपण शल्यचिकित्सक डॉ. विक्रम सातव, डॉ. शशिकांत भनगे और भूलतज्ज्ञ डॉ. संगीता चंद्रशेखर इनका समावेश था. यकृत प्रत्यारोपण टीम में यकृत प्रत्यारोपण शल्यचिकित्सक डॉ. स्मिता पारख, डॉ. मनोज श्रीवास्तव और भूलतज्ज्ञ डॉ. श्रीकांत कोटे इनका समावेश था.साथ ही प्रत्यारोपण समन्वयक महेश तुपे भी शामिल थे.
नोबल हॉस्पिटल्स अँड रिसर्च सेंटर के उपव्यवस्थापकीय संचालक डॉ. दिविज माने ने कहा की, “अवयवदान मानवता का अत्यंत उदात्त और प्रेरणादायी रूप है. किसी परिवार के दुःख को दूसरों के लिए आशा और नए जीवन में बदलने की शक्ति अवयवदान में है. अवयवदान को लेकर बढ़ती जागरूकता के कारण हम देख रहे हैं कि ऐसे कठिन समय में भी परिवार अपने व्यक्तिगत दुःख से ऊपर उठकर दूसरों की जान बचाने के लिए आगे आ रहे हैं. इस जीवनदायी अभियान के समन्वय और सफल क्रियान्वयन में योगदान देने वाले झेडटीसीसी पुणे तथा सभी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा टीमों का हम दिल से आभार व्यक्त करते हैं.”



