भक्ति, लोक और कृष्ण-संस्कृति का रंगमंच 4 सितम्बर को
श्रीकृष्ण पर्व में होंगी श्रीकृष्ण आख्यान की मनोहारी कला-अभिव्यक्तियाँ
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान रीवा मध्य प्रदेश
रीवा . भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन, लोक आस्था और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को कला के विविध रंगों में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से रीवा में श्रीकृष्ण पर्व का आयोजन किया जा रहा है। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन रीवा के सहयोग से यह आयोजन 4 सितम्बर को शाम 7 बजे टाउन हॉल, रीवा में आयोजित होगा, जिसमें संगीत, लोकगायन, नृत्य और भक्ति की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से दर्शकों को कृष्णमय कर देगा।
संस्कृति विभाग के संचालक एनपी नामदेव ने बताया कि इस कार्यक्रम में श्रीकृष्ण के जीवन और उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को अलग-अलग कला विधाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाएगा। कार्यक्रम का आरंभ बघेली लोकगायन की सुमधुर प्रस्तुति से होगी। रीवा की सुश्री कल्याणी मिश्रा एवं साथी अपनी प्रस्तुति के माध्यम से स्थानीय लोकभाषा और लोक संस्कृति में रचे-बसे कृष्ण भाव को स्वर देंगी। इसके पश्चात सुश्री आस्था सिजारिया एवं साथी, कटनी द्वारा श्रीकृष्ण केंद्रित नृत्य नाटिका प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें नृत्य और अभिनय के माध्यम से कृष्ण की लीलाओं एवं जीवन-दर्शन की मनोहारी झलक देखने को मिलेगी। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण भक्ति गायन होगा, जिसमें सुश्री वैशाली रैकवार एवं साथी, भोपाल भक्तिमय प्रस्तुतियों से वातावरण को आध्यात्मिक रंग से सराबोर करेंगे। कार्यक्रम में प्रवेश नि:शुल्क रहेगा। उन्होंने बताया कि ‘श्रीकृष्ण पर्व’ केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोक परंपरा, भक्ति और भारतीय जीवन-दर्शन से जुड़ने का अवसर है। श्रीकृष्ण का चरित्र भारतीय संस्कृति में प्रेम, करुणा, कर्म, लोकमंगल और जीवन के उत्सव का प्रतीक रहा है। यही भाव इस आयोजन की विभिन्न प्रस्तुतियों में देखने को मिलेगा।

