
दिशाहीन नियोजन और अनियंत्रित एफएसआई मंजूरियों से पुणे पर बढ़ रहा ट्रैफिक संकट
रास्ते, पानी और बुनियादी सुविधाओं का संकट भी गहराने की आशंका; विशेषज्ञों ने जताई चिंता
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे,। पुणे शहर में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और विकास के लिए प्रभावी नियोजन के अभाव को लेकर वास्तुविशारदों, नगररचनाकारों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस उपाय नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में यातायात, पानी, सड़क, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं का संकट और गंभीर हो सकता है।
पुणे महानगर का विकास सुनियोजित तरीके से तथा नगर नियोजन विभाग के निर्देशों के अनुसार टीपी, डीपी और एमआरटीपी एक्ट के अनुरूप हो रहा है या नहीं, इस विषय पर राजीव गांधी स्मारक समिति की ओर से परिसंवाद आयोजित किया गया। इसमें पुणे के वर्तमान और भविष्य के शहरी विकास पर विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
परिसंवाद में पूर्व सांसद एडवोकेट वंदना चव्हाण, पूर्व महापालिका आयुक्त महेश झगड़े, पूर्व महापौर एवं कांग्रेस पुणे शहराध्यक्ष (पूर्व विभाग) प्रशांत जगताप, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के नेता नितीन गावडे, पर्यावरण विशेषज्ञ सारंग यादवाडकर, सीओईपी के पूर्व प्राध्यापक प्रताप रावळ, वास्तुविशारद मकरंद शेंडे, संग्राम खोपड़े, पर्यावरण विशेषज्ञ प्राजक्ता दिवेकर, वास्तुविशारद शिरीष केंभवी तथा सहकारी गृहनिर्माण सोसायटी महासंघ के सुहास पटवर्धन सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। समिति के अध्यक्ष गोपालदादा तिवारी सहित समिति के सदस्य भी मौजूद थे।
वंदना चव्हाण ने कहा कि शहरीकरण और बढ़ती आबादी के कारण पुणे पहले से ही कई समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के संबंध में मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों से कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते शहर की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और भविष्य में पुणे रहने योग्य नहीं रहा तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी।
महेश झगड़े ने कहा कि पीएमआरडीए क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण अनुमतियों के कारण निर्माण और आबादी दोनों में तेजी से वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर पानी, सड़क और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से नागरिकों को जवाब मांगना चाहिए।

प्राजक्ता दिवेकर ने वेताळ टेकड़ी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में तीन बड़े यातायात प्रकल्प प्रस्तावित हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका है। उन्होंने कहा कि टेकड़ी के संरक्षण के लिए स्थानीय नागरिक एकजुट हो रहे हैं।
शिरीष केंभवी ने कहा कि प्रत्येक शहर की भौगोलिक और सामाजिक संरचना अलग होती है। इसलिए उसी के अनुरूप विकास योजना तैयार की जानी चाहिए। सभी शहरों को एक ही मॉडल में विकसित करने का प्रयास उचित नहीं है।
संग्राम खोपड़े ने कहा कि शहर की नागरिक समस्याओं को लेकर नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यातायात की समस्या लंबे समय से गंभीर है, लेकिन यह चुनावी मुद्दा नहीं बन पाई। नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से स्थिति में बदलाव लाया जा सकता है।
सुहास पटवर्धन ने कहा कि पुणे शहर में बड़ी संख्या में सहकारी गृहनिर्माण सोसायटियां हैं। उन्होंने निर्माण अनुमति और सोसायटियों के पुनर्विकास की प्रक्रिया में पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार पारदर्शी प्रक्रिया से पुनर्विकास को अधिक सुगम बनाया जा सकता है।
प्रताप रावळ ने कहा कि पुणे का विस्तार बहुत तेजी से हुआ है। उन्होंने शहर के नियोजन में टाउन प्लानिंग विशेषज्ञों की अधिक प्रभावी भूमिका की आवश्यकता बताई और कहा कि लंबे समय से चली आ रही नागरिक समस्याओं के समाधान के लिए नियोजन की पद्धति में बदलाव जरूरी है।
वास्तुविशारद मकरंद शेंडे ने कहा कि शहर के सामने दिखाई दे रहे संकट को लेकर विशेषज्ञों और नागरिकों को अधिक सक्रिय होने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पुनर्विकास के नाम पर बड़े पैमाने पर निर्माण करते समय भविष्य में पानी और ऊर्जा जैसी सीमित संसाधनों की उपलब्धता को ध्यान में रखना जरूरी है।
प्रशांत जगताप ने पुणे के विकास और विभिन्न परियोजनाओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने रिंग रोड की लागत में वृद्धि का मुद्दा उठाते हुए इसकी समीक्षा की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के कारण प्राकृतिक जलस्रोतों और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का भी आकलन किया जाना चाहिए।
नितीन गावडे ने कहा कि शहर के विकास में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर पर्याप्त नियोजन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऊंची इमारतों को बड़े पैमाने पर मंजूरी दिए जाने के साथ पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं पर पड़ने वाले दबाव का भी विचार होना चाहिए। उन्होंने नागरिकों से शहर की समस्याओं के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।
कार्यक्रम के प्रास्ताविक भाषण में गोपालदादा तिवारी ने कहा कि नियोजन के अभाव में पुणे शहर की स्थिति गंभीर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि नागरिकों, प्रशासन और राजनीतिक क्षेत्र को शहर की समस्याओं के समाधान के लिए एक साथ आना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस परिसंवाद से जनमत तैयार होगा और पुणे के भविष्य के नियोजन पर अधिक गंभीरता से विचार किया जाएगा।
परिसंवाद का संचालन गोपालदादा तिवारी ने किया। राजीव गांधी स्मारक समिति की ओर से भोला वांजळे, नंदकुमार पापळ, स्वाती शिंदे, संजय अभंग, धनंजय भिलारे, सुभाष जेधे, आबा जगताप, योगीराज नाईक, राजेश सुतार, आबा तरवडे, हरिदास अडसुळ, गणेश शिंदे, फैयाज शेख और विकास दवे सहित अन्य ने वक्ताओं का स्वागत एवं सत्कार किया।


