
औषधीय पौधों के संरक्षण एवं उपयोग पर संगोष्ठी आयोजित, ‘Medicinal Plant Under Stress’ पुस्तक का विमोचन
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान रीवा मध्य प्रदेश
रीवा, । प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, रीवा के वनस्पति शास्त्र विभाग के म्यूजियम में “Medicinal Plant Under Stress” विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य औषधीय पौधों के महत्व, उनके संरक्षण, तनाव की परिस्थितियों में उनकी उपयोगिता तथा भारतीय ज्ञान परंपरा में औषधीय वनस्पतियों के पारंपरिक उपयोग के प्रति विद्यार्थियों एवं उपस्थित जनों को जागरूक करना था।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. नवीन तिवारी, पूर्व आयुक्त, रहे। डॉ. तिवारी द्वारा लिखित पुस्तक “Medicinal Plant Under Stress” का विमोचन इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रविंद्र नाथ तिवारी एवं वनस्पति शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार अग्निहोत्री द्वारा किया गया।
अपने व्याख्यान में डॉ. नवीन तिवारी ने भारतीय ज्ञान परंपरा में औषधीय पौधों के महत्वपूर्ण स्थान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्राचीन काल से ही भारत के ऋषि-मुनियों एवं आचार्यों द्वारा विभिन्न औषधीय वनस्पतियों की पहचान, उनके गुणों तथा विभिन्न रोगों में उनके उपयोग का ज्ञान विकसित किया गया था। उन्होंने कहा कि हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में पौधों का ज्ञान केवल उपचार तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और मानव जीवन के बीच संतुलन की व्यापक अवधारणा से जुड़ा हुआ था। उन्होंने औषधीय पौधों पर बढ़ते पर्यावरणीय एवं जैविक तनाव के प्रभाव तथा उनके संरक्षण की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रविंद्र नाथ तिवारी ने अपने उद्बोधन में पुस्तकों को ज्ञान अर्जन का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि किसी भी विषय का व्यवस्थित एवं प्रमाणिक ज्ञान पुस्तकों के अध्ययन से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा में औषधीय वनस्पतियों के महत्व को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को पारंपरिक ज्ञान के वैज्ञानिक अध्ययन एवं संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
वनस्पति शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार अग्निहोत्री ने अपने उद्बोधन में औषधीय पौधों की व्यापक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों, जैसे आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी तथा आधुनिक चिकित्सा पद्धति, में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से वनस्पतियों एवं उनसे प्राप्त जैव-सक्रिय पदार्थों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने औषधीय पौधों के वैज्ञानिक अध्ययन, संरक्षण एवं सतत उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. भारतेंदु मिश्र द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. अनूप सिंह बघेल ने उपस्थित अतिथियों, वक्ताओं, प्राचार्य, विभागाध्यक्ष, महाविद्यालय के प्राध्यापकों, कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
संगोष्ठी में डॉ. प्रकाश चंद्र पटेल, डॉ. शिवगोपाल सिंह, डॉ. बाल महेंद्र प्रजापति, डॉ. जितेंद्र त्रिपाठी, डॉ. अनीता तिवारी, रुचि मिश्रा, आशीष सिंह सहित वनस्पति शास्त्र विभाग की स्नातकोत्तर कक्षाओं के छात्र-छात्राएं तथा एनसीसी कैडेट्स प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने औषधीय पौधों के पारंपरिक एवं आधुनिक महत्व, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों में औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण से संबंधित विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। संगोष्ठी ने विद्यार्थियों में औषधीय पौधों के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा भारतीय पारंपरिक वनस्पति ज्ञान को समझने की दिशा में उपयोगी भूमिका निभाई।


