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भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सोच की पड़ताल: आदित्य बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस के अ-निश्चित इंडेक्स 2.0 से मिली जानकारियां

भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सोच की पड़ताल: आदित्य बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस के अ-निश्चित इंडेक्स 2.0 से मिली जानकारियां

~ 81% भारतीय मानते हैं कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं बढ़ रही हैं, जबकि लगभग 80% लोग थेरेपी या काउंसलिंग लेने में हिचकिचाते हैं ~

 

~ 20 शहरों के 3,583 लोगों पर किए गए सर्वे से पता चलता है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नजरिया क्षेत्र और जेंडर के हिसाब से काफी अलग है ~

 

~ एबीएसएलआई और एमपावर दिवंगत पॉलिसीधारकों के परिवारों को ग्रीफ काउंसलिंग देते हैं ~

 

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान मुंबई महाराष्ट्र 

 

मुंबई, : भारत में विविध वित्तीय सेवाएं देने वाली अग्रणी कंपनी, आदित्य बिरला कैपिटल की जीवन बीमा सहायक कंपनी आदित्य बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (“एबीएसएलआई”) ने 10 अक्टूबर को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे से पहले आज अपने अ-निश्चित इंडेक्स 2.0 के नतीजे जारी किए।

 

 

 

नतीजे बताते हैं कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन पेशेवर मदद लेने में हिचकिचाहट अब भी बनी हुई है। इनसे यह भी पता चलता है कि देश भर में मानसिक स्वास्थ्य की तस्वीर एक जैसी नहीं है। थेरेपी को लेकर नजरिया और लोगों की चिंताएं क्षेत्र और जेंडर के हिसाब से काफी अलग-अलग हैं।

 

 

 

मुख्य नतीजे:

 

81% भारतीय मानते हैं कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं बढ़ रही हैं, जबकि लगभग 80% लोग थेरेपी या काउंसलिंग लेने में हिचकिचाते हैं

पूर्वी भारत में सबसे ज्यादा हिचकिचाहट है। पूर्व के 25% लोगों ने कहा कि वे थेरेपिस्ट के पास जाने में हिचकिचाएंगे, जबकि उत्तर में यह आंकड़ा 22%, पश्चिम में 21% और दक्षिण में 14% रहा

पूर्व में पुरुष महिलाओं से ज्यादा हिचकिचाते हैं। पूर्व में 27% पुरुषों ने हिचकिचाहट जताई, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 24% रहा

मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती समस्याओं को लेकर पूर्व सबसे ज्यादा चिंतित है। पूर्व के 26% लोगों ने यह चिंता जताई

उत्तर और पश्चिम में महिलाएं पुरुषों से ज्यादा चिंतित हैं। मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के बढ़ते मामलों को लेकर 25% महिलाएं और 22% पुरुष चिंतित हैं

पूर्व में माता-पिता अपने बच्चों को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित हैं। पूर्व के 25% माता-पिता इस बात को लेकर चिंतित हैं कि उनके बच्चे जिंदगी के झटकों से कैसे उबरेंगे, जबकि राष्ट्रीय औसत 21% है

 

 

एमपावर के विश्लेषण के अनुसार, इन नतीजों से साफ है कि मानसिक स्वास्थ्य की चिंताओं को पहचानने से आगे बढ़कर शुरुआत में ही मदद लेने को सामान्य और आसान बनाने की जरूरत है। मदद लेने में आने वाली रुकावटें क्षेत्र और जेंडर के हिसाब से अलग-अलग हैं। ऐसे में नतीजे इस बात पर जोर देते हैं कि सहायता के ऐसे रास्ते तैयार किए जाएं, जो सुलभ हों, लोगों की जरूरतों से मेल खाते हों और जिन्हें अपनाना आसान हो। एबीएसएलआई के लिए यह जानकारी इस बात को और मजबूत करती है कि जिंदगी के मुश्किल दौर में वित्तीय सुरक्षा के साथ-साथ परिवारों की भावनात्मक जरूरतों का भी ख्याल रखना जरूरी है।

 

 

 

इसी सोच के तहत एबीएसएलआई एमपावर के साथ मिलकर दिवंगत पॉलिसीधारकों के परिवारों और करीबी लोगों को ग्रीफ काउंसलिंग (शोक परामर्श) देती है। यह सेवा उन्हें प्रशिक्षित काउंसलर्स से जोड़ती है, जो अपनों को खोने के दुख के दौरान पेशेवर मार्गदर्शन और भावनात्मक सहारा

 

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