
100वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उपलक्ष्य में
आलंदी में नांदी सम्मेलन – साहित्यनिष्ठों का संगम 29 तारीख को
69वें सम्मेलन की यादें होंगी ताजा; ग्रंथ-दिंडी सहित विविध कार्यक्रमों का आयोजन
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे,: ‘माझा मराठाचि बोलु कौतुकें, परि अमृतातेंहि पैजां जिंके’ इस ओवी का प्रत्यय देने वाले, 69वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन की यादों को ताजा करने वाले और 100वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन की नांदी बनने वाले ‘साहित्यनिष्ठों की मांदियाली’ नांदी सम्मेलन का आयोजन गुरुवार, दिनांक 29 अक्टूबर को सुबह 9 बजे आलंदी देवाची स्थित फ्रूटवाले धर्मशाला में होगा। इसमें ग्रंथ-दिंडी और ग्रंथ-पूजन का आयोजन किया गया है, यह जानकारी माईर्स एमआईटी शिक्षण संस्था समूह की महासचिव प्रो. स्वाती चाटे और महाराष्ट्र साहित्य परिषद के कार्यवाह सुनील महाजन ने पत्रकार परिषद में दी।
इस अवसर पर मसाप के जिला प्रमुख राजन लाखे, प्रसिद्ध गप्पाष्टककार डॉ. संजय उपाध्ये और समन्वयक डॉ. महेश थोरवे उपस्थित थे।
विश्वशांति केंद्र (आलंदी), माईर्स एमआईटी, महाराष्ट्र साहित्य परिषद और मराठी भाषा विभाग, महाराष्ट्र शासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह का उद्घाटन वरिष्ठ संगीतकार भावगंधर्व पं. हृदयनाथ मंगेशकर के करकमलों द्वारा सुबह 10 बजे होगा। अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. श्रीपाल सबनीस सम्माननीय अतिथि होंगे। सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ विचारक उल्हासदादा पवार करेंगे। सम्मेलन को एमआईटी विश्वशांति विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड का शुभाशीर्वाद प्राप्त होगा।
यह कार्यक्रम माईर्स एमआईटी शिक्षण संस्था समूह के कार्यकारी अध्यक्ष और प्रबंधकीय ट्रस्टी डॉ. राहुल वि. कराड और प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. मंगेश तु. कराड के मार्गदर्शन में हो रहा है।
समारोह के अवसर पर तत्वज्ञ संत श्री ज्ञानेश्वर संजीवन समाधि मंदिर से कार्यक्रम स्थल तक ग्रंथ-दिंडी निकाली जाएगी। मसाप के अध्यक्ष योगेश सोमण ग्रंथ-पूजन करेंगे। इस अवसर पर आलंदी के नगराध्यक्ष प्रशांत कुर्हाडे, आलंदी देवस्थान के प्रमुख ट्रस्टी भावार्थ देखणे और मसाप के कार्यवाह सुनील महाजन विशेष सम्माननीय अतिथि होंगे। दोपहर 12 से 1.15 बजे तक श्रीनाथ संस्थान के पीठाधिपति ह.भ.प. गुरुबाबा महाराज औसेकर के चक्री भजन का प्रस्तुतीकरण होगा।
दोपहर 2 से 3.15 बजे तक ‘तीर्थ-क्षेत्र को ज्ञान-तीर्थ क्षेत्र में परिवर्तित करने के लिए आज की पीढ़ी के संत, कीर्तनकार, प्रवचनकारों का योगदान’ इस विषय पर विचार-मंथन होगा। इस सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध गप्पाष्टककार डॉ. संजय उपाध्ये करेंगे। इस अवसर पर ह.भ.प. यशोधन महाराज साखरे, ‘रिंगण’ के संपादक सचिन परब और ह.भ.प. बापूसाहेब मोरे सम्माननीय वक्ता होंगे। दोपहर 3.30 से 4.45 बजे तक प्रसिद्ध अभिनेत्री मधुरा वेलणकर और डॉ. समीरा गुजर का ‘ज्ञानदेवे रचिला पाया’ सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा।
शाम 5 बजे होने वाले समापन समारोह में राज्य के सांस्कृतिक कार्य और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री आशीष शेलार, सिक्किम के पूर्व राज्यपाल श्रीनिवास पाटील और संत साहित्य के गहन अध्येता डॉ. सदानंद मोरे सम्माननीय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
नेशनल बुक ट्रस्ट के निदेशक राजेश पांडे और खेड विधानसभा के विधायक बाबाजी काले विशेष सम्माननीय अतिथि होंगे। महाराष्ट्र साहित्य परिषद के जिला प्रमुख प्रो. राजन लाखे, प्रभाकर ओव्हाळ और डॉ. पुरुषोत्तम काळे उपस्थित रहेंगे।


