महाराष्ट्र के उच्चशिक्षित और स्नातक मतदाताओं ने एकजुट होकर भाजपा को नकारा
संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा के लिए देशव्यापी संदेश : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोपालदादा तिवारी
शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव मतपत्रों से होते हैं, यह भी प्रधानमंत्री को मालूम नहीं होना बौद्धिक दिवालियापन : गोपालदादा तिवारी
मतपत्र से मतदान कराना ही कांग्रेस की भूमिका : गोपालदादा तिवारी
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान:पुणे, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में हुए स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के विधान परिषद चुनावों में कुल 5 सीटों में से 3 सीटें स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और 2 सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की थीं। इनमें तीनों स्नातक सीटों पर कांग्रेस एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) महाविकास आघाड़ी की जीत हुई है।
इस जीत के माध्यम से प्रगतिशील महाराष्ट्र के मतदाताओं ने समाज में नफरत फैलाने वाली शक्तियों के खिलाफ तथा संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा के पक्ष में भाजपा और महायुति के विरोध में अपना स्पष्ट जनादेश दिया है। यह पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। यह बात महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने कही।
उन्होंने आगे कहा कि विधायक श्री अभिजीत वंजारी (नागपुर स्नातक), श्रीमती हर्षदा जाधव-देशमुख (पुणे स्नातक) तथा डॉ. प्रतापसिंह पाटील (संभाजीनगर स्नातक) को राज्य के पश्चिम महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ जैसे तीन अलग-अलग क्षेत्रों के स्नातक मतदाताओं ने सोच-समझकर मतदान करते हुए विजयी बनाया है। इससे मतदाताओं ने अपनी शैक्षणिक और सामाजिक जागरूकता का परिचय दिया है।
उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज, समाज सुधारकों और भाईचारे की शिक्षा देने वाले संतों का महाराष्ट्र हमेशा से प्रगतिशील विचारों का वाहक रहा है। स्वतंत्रता पूर्व काल से ही देश को दिशा देने वाले राष्ट्रीय एवं सामाजिक क्रांतिकारियों की समृद्ध परंपरा इस भूमि को प्राप्त है।
भाजपा द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए दलों और सरकारों को तोड़ने, संवैधानिक व्यवस्थाओं के उल्लंघन, स्वायत्त संस्थाओं के दुरुपयोग और कथित मत चोरी के खिलाफ जनता ने अपना विरोध दर्ज कराया है। यह भाजपा और उसकी सत्ता-केंद्रित राजनीति के खिलाफ जनता का स्पष्ट संदेश है।
उन्होंने आगे कहा कि उच्चशिक्षित मतदाता अस्थायी धार्मिक ध्रुवीकरण के प्रभाव में नहीं आए, क्योंकि वे तनावमुक्त विकास और सामाजिक एकता का सपना देखते हैं।
शाहू-फुले-आंबेडकर के साथ कर्मवीर भाऊराव पाटील, लोकमान्य तिलक और महान समाज सुधारक गोपाल गणेश आगरकर के विचारों की विरासत भी महाराष्ट्र को मिली है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने महाराष्ट्र की प्रगतिशील परंपरा को कमजोर करने का प्रयास किया, लेकिन अब जनता को इन शक्तियों के खतरे का एहसास होने लगा है।
यह संतों और समाज सुधारकों की भूमि है। यहां धर्म के नाम पर अधर्म की राजनीति और जनता के मूल सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश अधिक समय तक सफल नहीं हो सकती। प्रगतिशील परंपराओं को मानने वाले प्रतिनिधियों को ही सत्ता में होना चाहिए, यह संदेश शिक्षित मतदाताओं ने दिया है।
गोपालदादा तिवारी ने आगे कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय शीर्ष नेतृत्व के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी नागपुर, झांसी, प्रयागराज, पटना-नालंदा विश्वविद्यालय और गोरखपुर के उच्चशिक्षित स्नातक मतदाताओं ने भाजपा को नकारा है।
इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बैलेट पेपर पर कांग्रेस के अस्तित्व को लेकर सवाल उठाना आश्चर्यजनक है। स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव प्राथमिकता क्रम के आधार पर मतपत्रों से ही होते हैं। इतनी सामान्य चुनाव प्रक्रिया की जानकारी प्रधानमंत्री को न होना क्या बौद्धिक दिवालियापन नहीं है? ऐसा व्यंग्यात्मक सवाल भी कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने उठाया।

