येरवडा म्हाडा कॉलोनी के पुनर्विकास को गति, संशोधित आराखड़े की प्रक्रिया प्रगति पर
75 एकड़ क्षेत्र की 90 से अधिक पुरानी इमारतों के पुनर्विकास की उम्मीद; रक्षा विभाग की मंजूरियां बनी चुनौती
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे, प्रतिनिधि। येरवडा स्थित महाराष्ट्र हाउसिंग बोर्ड की म्हाडा कॉलोनी में करीब 40 वर्ष पुरानी इमारतों के पुनर्विकास की प्रशासनिक प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। लगभग 75 एकड़ में फैली इस कॉलोनी की 90 से अधिक इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। संशोधित विकास आराखड़े को मंजूरी देने की प्रक्रिया जारी है, जबकि समूह पुनर्विकास के लिए व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने की तैयारी पुणे गृहनिर्माण एवं क्षेत्र विकास मंडल की ओर से शुरू कर दी गई है। हालांकि, रक्षा विभाग के प्रतिबंध और आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्राप्त करना अभी भी बड़ी चुनौती है। यह जानकारी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के प्रदेश सचिव बालासाहेब जानराव ने दी।
येरवडा के सर्वे नंबर 191-अ-1 और 191-अ-2 स्थित म्हाडा कॉलोनी के पुनर्विकास को लेकर पुणे गृहनिर्माण एवं क्षेत्र विकास मंडल की ओर से शासन स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। पुरानी हो चुकी इमारतों के कारण निवासियों की सुरक्षा का मुद्दा गंभीर हो गया है। ऐसे में पुनर्विकास जल्द शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
मंडल के अनुसार, पुणे महानगरपालिका द्वारा 30 अक्टूबर 1999 को मंजूर विकास आराखड़े के आधार पर कॉलोनी के लेआउट को मंजूरी दी गई थी। वहीं, UDCPR-2020 के प्रावधानों के अनुसार संबंधित भूखंड पर 3.00 एफएसआई (फ्लोर स्पेस इंडेक्स) अनुमत है।
पुराने लेआउट में मौजूदा विकास नियंत्रण नियमों और वर्ष 2017 में मंजूर विकास आराखड़े के अनुरूप आवश्यक बदलाव नहीं किए गए थे। इसके चलते पुनर्विकास में तकनीकी अड़चनें सामने आई हैं। इन्हें दूर करने के लिए संशोधित लेआउट तैयार किया जा रहा है। इसके लिए मंडल के पैनल पर नियुक्त वास्तुविदों के माध्यम से संबंधित प्राधिकरणों और पुणे महानगरपालिका से मंजूरी लेने की प्रक्रिया जारी है।
कॉलोनी का क्षेत्र रक्षा विभाग तथा लोहगांव विमानतल से संबंधित प्रतिबंधित क्षेत्र के प्रभाव में आता है। इसके चलते इमारतों की ऊंचाई पर भी सीमाएं लागू हैं। पुणे महानगरपालिका के ऊंचाई प्रमाणपत्र के अनुसार भवनों की ऊंचाई की सीमा जमीन के स्तर से 566.50 मीटर + 75.75 मीटर, यानी कुल 642.25 मीटर निर्धारित की गई है।
इसके अलावा रक्षा विभाग की सीमा से 100 मीटर के दायरे में लागू निर्माण प्रतिबंधों के कारण पुनर्विकास में अड़चनें आ रही हैं। ऐसे में संबंधित विभागों की एनओसी और आवश्यक तकनीकी मंजूरियां महत्वपूर्ण होंगी।
सभी इमारतों का एक साथ पुनर्विकास करने के बजाय समूह पुनर्विकास का विकल्प भी विचाराधीन है। इसके लिए प्राधिकरण के आगामी निर्देशों के अनुसार व्यवहार्यता रिपोर्ट प्रस्तुत करने की तैयारी शुरू है।
बालासाहेब जानराव ने मांग की है कि निजी डेवलपर्स को शामिल किए बिना म्हाडा स्वयं इन इमारतों का छोटे-छोटे समूहों में पुनर्विकास करे। उनका कहना है कि आवश्यक प्रशासनिक एवं रक्षा विभाग की मंजूरियां मिलने के बाद इस प्रक्रिया को वास्तविक गति मिल सकती है। पुनर्विकास होने से वर्षों से इंतजार कर रहे रहवासियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।


