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दिव्यांग बच्चों और उनकी माताओं का सम्मान कर मनाई वसुबारस, देवतरु फाउंडेशन की अनूठी पहल

दिव्यांग बच्चों और उनकी माताओं का सम्मान कर मनाई वसुबारस, देवतरु फाउंडेशन की अनूठी पहल

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान पुणे महाराष्ट्र 

पुणे : दिवाली के अवसर पर परंपरानुसार घर-घर में गाय और बछड़े का पूजन कर वसुबारस का पर्व मनाया जाता है। इसी परंपरा को एक अनूठा सामाजिक स्वरूप देते हुए देवतरु फाउंडेशन ने दिव्यांग बच्चों और उनकी माताओं का सम्मान एवं पूजन कर वसुबारस मनाई।

 

कार्यक्रम प्रमुख सीमा दाबके ने बताया कि एक मां जीवनभर अपने दिव्यांग बच्चे की देखभाल और उसे आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनाने के लिए अथक मेहनत करती है। इसी भावना को सम्मान देते हुए हम दिव्यांग बच्चे की मां को गाय और बच्चे को बछड़े का प्रतीक मानकर दोनों का पूजन एवं सम्मान करते हैं। इस तरह हम वास्तविक अर्थों में वसुबारस का पर्व मनाते हैं।

 

देवतरु फाउंडेशन में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का यह 20वां वर्ष था। इस अवसर पर 11 दिव्यांग विद्यार्थियों और उनकी माताओं का सम्मान एवं पूजन किया गया। विद्यार्थियों को दिवाली के फराल (मिठाई-नाश्ते), दीपक और आकाशकंदील भेंट किए गए, जबकि उनकी माताओं को साड़ी देकर सम्मानित किया गया।

 

देवतरु वृद्धाश्रम के बुजुर्गों के साथ गाय-बछड़े का पूजन कर उनका आशीर्वाद भी प्राप्त किया गया। यह जानकारी देवतरु फाउंडेशन की संस्थापक दीपिका खिंवसरा ने दी।

 

इस अवसर पर आरती लोया, कमल लोया, शमा गोयल, ज्योति भंडारी, चैताली पटनी, माधुरी पंडित, प्रीति परांजपे, स्वाति पुरंदरे सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

 

फोटो कैप्शन: दिव्यांग बच्चों, उनकी माताओं और कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य लोगों का समूह चित्र।

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