
महिलांए अन्याय के खिलाफ कानून का इस्तेमाल करे
पूर्व मुख्य जिला न्यायाधीश साधन शिंदे के विचार
एमआईएमईआर मेडिकल कॉलेज में ‘ महिला कानूनी अधिकार’ पर संगोष्ठी
पुणे :हर एक महिला दिल से मजबूत होती है. वह पूरे परिवार की देखभाल करते हुए अपनी और अपने बच्चों के लिए प्रगति करती है. ऐसे समय में उसे कानून के नए प्रावधानों के बारे में पता होना चाहिए. उसके साथ हो रहे अन्याय से लडने में सक्षम होना समय की मांग है. उसके लिए कानून का ज्ञान होना चाहिए. ऐसे विचार पूर्व जिला न्यायाधीश साधन शिंदे ने कहे.
माईर एमआईटी पुणे के एमआईएमईआर मेडिकल कॉलेज और डॉ. भाऊसाहेब सरदेसाई तलेगांव ग्रामीण अस्पताल ने महिला दिवस के अवसर पर महिला कानूनी अधिकार विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया. इस मौके पर वह बतौर मुख्य अतिथि के रुप में बोल रहे थे.
इस समय एमआईएमईआर मेडिकल कॉलेज के कार्यकारी निदेशक डॉ. सुचित्रा नागरे, प्राचार्य डॉ. स्वाति बेलसरे, चिकित्सा अधीक्षक प्रशांत कामत, स्त्री रोग विभाग प्रो.डॉ. सुषमा शर्मा, और डॉ. प्रिया करमानी मौजूद थी.
साधना शिंदे ने कहा, महिलाएं अक्सर पुरूष प्रधानता की मानसिकता से अभिभूत होती है. उस समय उसे कानून पर भरोसा करना चाहिए, भावकुकता पर नहीं, ताकि उसे न्याय मिल सके. महिलाओं की सुरक्षा के लिए सरकार ने कई कानूनों में संशोधन किया है. हमें उस कानून को जानने की जरूरत है.
डॉ. सुचित्रा नागरे ने कहा, आज महिलाओं को सक्षम होने की जरूरत है. अगर वह सक्षम होती है तो पूरा परिवार सक्षम होता है. अगर एक महिला सक्षम है तो क्या हो सकता है इसका सबसे अच्छा उदाहरण डॉ. विश्वनाथ कराड है. उनकी बडी बहन प्रयाग अक्का कराड ने उनके जैसे महान व्यक्तित्व को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
प्राचार्या डॉ. स्वाति बेलसरे ने प्रास्ताविक किया.
डॉ. प्रिया करमाणी ने सूत्रसंचालन और डॉ. सुषमा शर्मा आभार माना.


