
विश्वशांति के लिए डॉ.कराड का जीवन समर्पित
डॉ. विश्वनाथ कराड को अहिंसा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार २०२३ की घोषणा
पुणे: शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य पर ताउम्र अध्यात्म, विज्ञान और शिक्षा क्षेत्र के कार्य को लेकर विख्यात दूरदर्शी, शिक्षा विशेषज्ञ, शांतिदूत प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा.कराड के ब्रांझ निर्मित पुतले का विमोचन राजबाग लोणी कालभोर स्थित विश्व के सबसे बडे गुम्बद में सभी धर्म गुरुओं उपस्थिति में संपन्न हुआ.
इस समय सभी धर्म गुरुओं ने अपनी राय रखते हुए कहा कि, शिक्षा और अध्यात्म का दामन पकडकर विश्वशांति के लिए अपना जीवन समर्पीत करनेवाले विश्वधर्मी प्रा.डॉ. विश्वनाथ कराड अनूठे व्यक्ति है. वसुधैव कुटुम्बकम् और एकम् सत् विप्रा बहुधा वदन्ती के तत्वों पर चलने वाले इस व्यक्ति ने बताये शांति की राह पर सारा समाज चलने की कोशिश करेगा. उनके विचार हर व्यक्ति को शांति की दिशा में ले जाऐंगे. गुम्बद को देखने आनेवाले सभी व्यक्ती को यह पुतला एक उर्जादायी प्रेरणा बनेगा.
इस मौके पर यूएसए के स्पैन कन्स्ट्रक्शन एंड इंजिनियरिंग के अध्यक्ष और सीईओ किंग हुसेन,्र ब्रिघम यंग, शिल्पकार डी.जे. बॉडन और माइक्रोलिन एलएलसी के संस्थापक डॉ. अशोक जोशी, डेव्हीड हंसमन, रोनाल्ड गूेल, रामविलास वेंदांती, महंत रामदास, राहुल भन्ते बोधी, आइजैक मलेकर, लेसन आजादी, आचार्य लोकेश मुनी, एडिसन सामराज, प्रो.डॉ. मास्टर मेहर मूस, सईद अजीज निजामी, मौलाना अन्सारी, ब्रह्माकुमारी निलिमा दिदी और पं. वसंतराव गाडगील की प्रमुख उपस्थिती थी.
साथ ही एमआयटी वर्ल्ड पीस युनिव्हर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष विश्वधर्मी प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड, कार्याध्यक्ष राहुल विश्वनाथ कराड और एमआयटी एडीटी यूनिवर्सिटी के कार्याध्यक्ष प्रा. डॉ. मंगेश तु. कराड उपस्थित थे.
शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य पर विश्वधर्मी प्रो.डॉ. विश्वनाथ कराड को पगडी, घोंगडी, सार्थ ज्ञानेश्वरी का ग्रंथ और विणा देकर विशेष सन्मान किया गया. साथ ही जैन धर्म की ओर से लोकेश मुनीने यह घोषणा की कि डॉ. विश्वनाथ कराड को अहिंसा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार २०२३ से सम्मानित किया जाएगा.
इस समय अपनी भावना जताते हुए डॉ. विश्वनाथ दा कराड ने कहा, मैं अपने शब्द बया नहीं कर सकता हूं. जीवन का उद्देश क्या है. आगे चलकर क्या करना है. शिक्षा की नई संकल्पना है. इस बात को समझना जरूरी है.
किंग हुसेन ने कहा, भारतीय शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य पर ऐसे महान शिक्षक के पुतले का अनावरण करना एक त्योहार जैसा है. वे एक बेहतरीन इंजीनियर होने के साथ शांति के लिए अपना जीवन व्यतीत कर रहे है. आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में जी २० की बैठक होना गर्व की बात है.
डी. टॉड क्रिस्टोफरसन ने कहा, सफलता की चाबी शिक्षा होती है इस बात को डॉ. कराड बेहतरीन जानते है, इसी को लेकर उन्होंने मूल्यवर्धीत शिक्षा पर अधिक जोर दिया है.
ब्रायन ब्रॅन ने कहा, अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय से डॉ. कराड छात्रों को जो शिक्षा दे रहे है वे दुनिया की सबसे बेहतरीन है. भारत विश्व में ज्ञान का दालन बनकर उभरेगा. चांद्रयान ३ भारत का नक्शा बदलेगा. वसुधैव कुटुम्बकम् यह भारतीय तत्वज्ञान जीवन की दिशा दर्शता है. इस तत्व पर म.गांधी, पं. नेहरू की तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चल रहे है.
डॉ. रामविलास वेदांती ने कहा, सांप्रदायिक और राष्ट्रीय एकता का एकमात्र सूत्रधार डॉ. कराड है. वे सबको साथ लेकर चलने वाले है. इस गुम्बद में विश्व दर्शन होता है. साथ ही सारे धर्मों के लोगों को एक साथ लाने का काम इन्होंने किया. देश में जी २० शिखर सम्मेलन पुणे और दिल्ली में हो रहा है. यह गर्व की बात है.
आचार्य लोकेश मुनी ने कहा, जी २० का आगाज इस डोम में होना यह शाश्वत विकास का पहला कदम है. साथ ही समाज में शांति लाने के लिए अपनों के साथ दुसरों के विचारों का सम्मान करना सीखना है. डॉ. कराड के कार्यों को देखते हुए वर्ष २०२३ का अहिंसा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा.
इसके बाद हनुमान गढ़ी, अयोध्या के महंत रामदास, भन्ते महाथेरो राहुल, आयझॅक मलेकर, एडीसन सामराज और डॉ. मेहर मास्टर मूस ने अपने विचारों में डॉ. कराड के कार्यो की प्रशंसा की.
अपनी भावना जताते हुए प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, आज मै अपने शब्द बया नहीं कर सकता हू. शिक्षा की नई संकल्पना रखने की जरूरत है. मूल्यवर्धीत शिक्षा के साथ विज्ञान, धर्म और अध्यात्म को एक साथ लाना समय की मांग है.
प्रो.डॉ. गौतम बापट ने सूत्रसंचालन किया. अशोक जोशी ने आभार माना.


