रीवा

कलेक्टर मऊगंज के अथक प्रयासों से 8 साल बाद गुमशुदा लवकुश को मिलेगा उसका परिवार

कलेक्टर मऊगंज के अथक प्रयासों से 8 साल बाद गुमशुदा लवकुश को मिलेगा उसका परिवार

रिपोर्ट धर्मेंद्र गुप्ता मऊगंज

रीवा  मऊगंज : हौसला और उम्मीद रख, जिंदगी में जीने के रास्ते मिलेंगे

कर्म पर अपने भरोसा रख, खुदा मदद के वास्ते मिलेंगे।।

वाकई में जिंदगी में कभी कभी ऐसे हालात पैदा हो जाते है जब व्यक्ति पूरी तरह  निराश हो जाता है,ं उम्मीद की एक भी किरण नजर नही आती और इन हालातों में जब उम्मीदों का सूरज दस्तक देता है तो अहसास होता है जैसे खुदा की इनायत बरस रही हो।  ऐसा ही वाकया लवकुश की जिंदगी में भी हुआ जब जरूरतमंदों के लिये हमेशा तैयार रहने वाले और दूसरों की पीडा को बखूवी समझने वाले संवेदनशील मऊगंज के कलेक्टर अजय श्रीवास्तव की बदौलत वे अपनेे माता पिता से 7 वर्षों बाद मिल पायेंगे। 7 वर्षों पूर्व अपनांे से बिछडे आठ वर्षीय बालक लवकुश और उसके माता पिता की उम्मीद टूट चुकी थी कि वे कभी दोबारा मिल पायेंगे पर मऊगंज कलेक्टर अजय श्रीवास्तव ने उनकी निराशा को आशा में बदला बल्कि उसे हकीकत भी बना दिया। कलेक्टर अजय श्रीवास्तव के प्रयासोे की बदौलत आज 23 अक्टूबर को वर्षों पूर्व खोया हुआ लवकुश अपने माता पिता से मिलेगा।  

 

जानकारी अनुसार मऊगंज जिले के रहने वाले श्री केमला साकेत पिता प्रहलादी , निवासी ग्राम बराती जनपद पंचायत मऊगंज का 8वर्षीय पुत्र लवकुश लगभग 7 वर्ष पूर्व  कंुभ के मेले के दौरान गुम हो गया था। लवकुश के माता पिता नेत्रहीन है  और भीख मांगकर गुजारा कर रहे थे। लवकुश ने बताया कि कोई अनजान व्यक्ति मेले से मुझे उठाकर अपने साथ ले गया था और अपने घर में रखकर मुझसे घर का काम करवाता था। और खाना पीना तक नही देता था। प्रताडना से तंग आकर मै वहां से भाग निकला।  इके बाद एक अन्य व्यक्ति मुझे अपने साथ  अपने घर ग्राम तासिमपुर थाना सलखुआ  जिला सहरसा बिहार ले गया। मैं वही रह रहा था और वहां भी मेरे साथ नौकर जैसा ही सलूक किया जाता था। इसी दौरान उसी गांव के रहने वाले एक व्यक्ति  आलोक भगत नेे देखा और उन्हे जब जानकारी प्राप्त हुई कि मै यहां का नही हंू और अपनो से बिछडकर यहां पहंुचा हंू तो  उन्होने मुझसे संपर्क कर जानकारी  मांगी । मुझे जितना भी अपने माता पिता गांव के बारे में पता था वो सब मैने उन्हे बताया।  आलोक जी ने मदद करते हुये नेट से सर्च कर मेरे घर गांव तहसील  जिले केे बारे में जानकारी जुटा कर  मऊगंज कलेक्टर अजय श्रीवास्तव से फोन पर संपर्क किया  और मेरे बारे में बताया।   मऊगंज कलेक्टर को जैसे ही  इस पूरी घटना  की जानकारी हुई उन्होने त्वरित कार्यवाही करते हुये सबंधित पते पर  प्रशासकीय अमले  को भेज कर सत्यापन करवाया। बच्चा गुम होने की पुष्टि की गई। 

वर्तमान में लवकुश के नेत्रहीन माता पिता अपने गृहग्राम में ही रह रहे हैं। जिनका भरण पोषण उनके भाई छकौडी साकेत द्वारा किया जा रहा है। जानकारी प्राप्त होते ही मऊगंज कलेक्टर के निर्देशानुसार प्रशासन ने छकौडी जी को बिहार भेजा गया जहां पर  आलोक भगत जी की सहायता से गुमशुदा लवकुश को उसके चाचा छकौडी को सपुर्दू  किया गया। जहां से इनको बिहार से सिमरी भक्तियारपुर से पाटलीपुत्र जक्ंशन के लिये ट्रेन में बैठा दिया गया है। जहां से कल यानी 23 अक्टूबर को लवकुश मऊगंज पहंुच जायेंगे। इतना ही नहीं मऊगंज कलेक्टर द्वारा एक वाहन भी प्रयागराज भेजा गया है जो लवकुश  को प्रयागराज से मऊगंज कलेक्ट्रेट लायेगा जहां पर लवकुश का सम्मान किया जायेगा और उन्हे उनके माता पिता से मिलवाया जायेगा । वहीं प्रशासन लगातार  इनके संपर्क में बना हुआ है। 

लवकुश अब अनाथ नही बल्कि अपने परिवार के साथ जिंदगी गुजारेंगे।  लवकुश क एक भाई और एक बहन भी है। जो नेत्रहीन  मां के साथ प्रयागराज उत्तर प्रदेश में रह रहे हैं।  मऊगंज कलेक्टर का प्रयास है कि प्रशासन की मदद से बिछडा हुआ अब ये पूरा परिवार एक साथ रहे और जिंदगी गुजर बसर करे।

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