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भारतीय ज्ञान परंपरा: जीवन मूल्यों का अक्षय स्रोत

भारतीय ज्ञान परंपरा: जीवन मूल्यों का अक्षय स्रोत

पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, रीवा में हिंदी पखवाड़ा का शुभारंभ

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान रीवा मध्य प्रदेश 

रीवा। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय आदर्श विज्ञान महाविद्यालय, रीवा के *भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ* के तत्वावधान में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में *हिंदी पखवाड़ा (14 से 28 सितंबर 2026)* के उद्घाटन सत्र के अवसर पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य *डॉ. आर. एन. तिवारी जी* ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ।

 

*प्राचार्य डॉ. आर. एन. तिवारी जी* ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि डिजिटल युग में भी ज्ञान का मूल आधार मातृभाषा ही है। देश में संवाद का माध्यम चाहे जो हो, परंतु चिंतन अपनी भाषा में ही होता है। मैकाले की शिक्षा पद्धति ने हमें अपनी भाषा से दूर किया। आजादी के बाद भी यह भ्रम फैलाया गया कि हिंदी में इंजीनियरिंग और विज्ञान की पढ़ाई संभव नहीं है। यदि हमें राष्ट्र को परम वैभव पर पहुँचाना है, तो भारतीय भाषाओं में शिक्षा प्राप्त करना ही होगा।

 

उन्होंने कहा कि विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी प्रमुख है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भी कहा था कि विज्ञान मातृभाषा में ही अधिक प्रभावी होता है। अंग्रेजों के जाने के बाद भी शिक्षा को लेकर जो नीतिगत विवाद थे, वे नई शिक्षा नीति 2020 के आने के बाद समाप्त हो गए हैं। मातृभाषा में असीम संभावनाएँ हैं। जिनके मन में यह भ्रांति है कि विज्ञान की पढ़ाई अंग्रेजी के बिना नहीं हो सकती, वे इस भ्रम को भूल जाएं। जब विश्व में फ्रेंच, जर्मन, चाइनीज, जापानी भाषाओं में विज्ञान पढ़ाया जा सकता है, तो हिंदी में क्यों नहीं? हम अपने महाविद्यालय में हिंदी में अध्यापन के लिए कृतसंकल्पित हैं।

 

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता *डॉ. विनोद कुमार विश्वकर्मा जी*, सह-प्राध्यापक, शास. ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा रहे। शाल, श्रीफल एवं पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया गया।

 

डॉ. विश्वकर्मा जी ने *”भारतीय ज्ञान परंपरा में जीवन मूल्य”* विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा – *”भारत केवल एक भूखंड नहीं, अपितु एक प्रकाश-पुंज है।”* भारतीय ज्ञान परंपरा ज्ञान का अक्षय भंडार है। जब हम जीवन की दिशा खोजते हैं, तो हमारे वेद, उपनिषद, रामचरितमानस और महाभारत हमें मार्ग दिखाते हैं।

 

उन्होंने कहा कि रामचरितमानस हमें *मर्यादा* सिखाती है और महाभारत *कर्म* का मर्म। भारतीय ज्ञान परंपरा एक सागर है जिसमें सभी संस्कृतियों को समाहित करने की शक्ति है। आज आवश्यकता है कि हम अपने जीवन मूल्यों को अपने इतिहास के पन्नों से पुनर्जीवित करें। यही हमारी सनातन संस्कृति और हिंदी भाषा की शक्ति है।

 

व्याख्यानोपरांत हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रकोष्ठ के अंतर्गत गठित छात्राओं के *’रंग दर्पण क्लब’* द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं पुस्तक-पोस्टर प्रदर्शनी लगाई गई।

 

इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. संतोष कुमार अग्निहोत्री, पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. भारतेंदु मिश्र सहित महाविद्यालय परिवार एवं विद्यार्थी गण उपस्थित रहे । कार्यक्रम का संचालन श्रीमती प्रियंका जायसवाल ने किया, कार्यक्रम-रूपरेखा प्रस्तुति डॉ. शकुंतला प्रजापति ने की श्री आशीष सिंह ने मुख्य वक्ता का विस्तृत परिचय दिया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. प्रीति विश्वकर्मा ने किया।image.png

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