जिन शिक्षकों ने पीढ़ियां गढ़ीं, आज वही अपने भविष्य के लिए रातभर बंगले के बाहर बैठे रहे
फॉलन आउट व्यवस्था और सेवा-सुरक्षा की मांग को लेकर अतिथि विद्वानों का संघर्ष जारी
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान रीवा मध्य प्रदेश
जिस शिक्षक के हाथों में कभी विद्यार्थियों का भविष्य होता है, वही शिक्षक जब अपने ही भविष्य की सुरक्षा के लिए रातभर खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर हो जाए, तो यह केवल एक कर्मचारी की समस्या नहीं रह जाती—यह शिक्षा व्यवस्था और समाज के सामने खड़ा एक गंभीर सवाल बन जाता है।
मध्य प्रदेश के विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वान मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को अपनी मांगों को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के भोपाल स्थित श्यामला हिल्स निवास के बाहर पहुंचे। अतिथि विद्वानों की प्रमुख मांगों में फॉलन आउट प्रक्रिया को रोकना तथा उनके भविष्य की सुरक्षा और स्थायित्व के लिए नीति लागू करना शामिल है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, विद्वानों का कहना है कि निर्धारित मुलाकात के लिए पहुंचने के बावजूद उनकी मंत्री से मुलाकात नहीं हो सकी और इसके बाद उन्होंने बंगले के बाहर ही धरना जारी रखा तथा रात वहीं बिताई।
वर्षों से उच्च शिक्षा की रीढ़ बने अतिथि विद्वान
अतिथि विद्वान केवल किसी महाविद्यालय में कुछ घंटों की कक्षाएं लेने वाले शिक्षक नहीं हैं। प्रदेश के अनेक महाविद्यालयों में लंबे समय से वे विद्यार्थियों को पढ़ाने, पाठ्यक्रम पूरा कराने, परीक्षाओं और अकादमिक गतिविधियों में सहयोग देने जैसी जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं। स्वयं उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित हालिया सामग्री में अतिथि विद्वानों को विषय विशेषज्ञों के रूप में ई-कंटेंट तैयार करने की प्रक्रिया में शामिल किए जाने का उल्लेख है।
ऐसे में सवाल केवल नौकरी का नहीं है। सवाल उन हजारों विद्यार्थियों का भी है, जिनकी कक्षाओं में इन शिक्षकों ने वर्षों तक ज्ञान का दीप जलाया है।
फॉलन आउट का डर
अतिथि विद्वानों की परेशानी का एक बड़ा कारण ‘फॉलन आउट’ व्यवस्था है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नियमित प्राध्यापक की नियुक्ति या स्थानांतरण होने पर उस पद पर कार्यरत अतिथि विद्वान की सेवा समाप्त हो सकती है। इससे वर्षों से कार्य कर रहे विद्वानों के सामने अचानक रोजगार और भविष्य की अनिश्चितता खड़ी हो जाती है।
यही वह असुरक्षा है जिसके खिलाफ अतिथि विद्वान लंबे समय से स्थायी और स्पष्ट नीति की मांग कर रहे हैं।
हरियाणा मॉडल की ओर उम्मीद
अतिथि विद्वानों द्वारा हरियाणा की सेवा-सुरक्षा व्यवस्था का भी उल्लेख किया जा रहा है। मध्य प्रदेश विधानसभा के रिकॉर्ड में दर्ज है कि सरकार ने हरियाणा की नीति का अध्ययन करने के लिए समिति बनाई है और मध्य प्रदेश के संदर्भ में उपयुक्त समाधान पर विचार किया जा रहा है।
हरियाणा सरकार ने भी सितंबर 2026 में विश्वविद्यालयों के गेस्ट फैकल्टी के लिए सेवा-सुरक्षा संबंधी नया कानून लाने की घोषणा की है।
बंगले के बाहर गुजरी रात ने खड़े किए सवाल
15 सितंबर की रात श्यामला हिल्स स्थित मंत्री आवास के बाहर बैठे अतिथि विद्वानों की तस्वीर केवल एक आंदोलन की तस्वीर नहीं है। यह उन शिक्षकों की व्यथा को सामने लाती है, जिन्होंने वर्षों तक विद्यार्थियों को पढ़ाया, लेकिन आज स्वयं अपने रोजगार और भविष्य की सुरक्षा के लिए दर-दर की गुहार लगाने को विवश हैं।
एक शिक्षक का सम्मान केवल मंच पर माला पहनाने से नहीं, बल्कि उसके श्रम, अनुभव और भविष्य की सुरक्षा से भी जुड़ा होता है। अतिथि विद्वानों की मांग है कि सरकार उनकी बात सुने, फॉलन आउट प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की दिशा में निर्णय करे और ऐसी स्पष्ट नीति बनाए जिससे वर्षों से उच्च शिक्षा में योगदान दे रहे विद्वानों को बार-बार अनिश्चितता का सामना न करना पड़े। क्योंकि जो शिक्षक विद्यार्थियों को उनके भविष्य का रास्ता दिखाता है, उसके अपने भविष्य पर अनिश्चितता का अंधेरा कितना उचित है—यह सवाल अब केवल अतिथि विद्वानों का नहीं, बल्कि पूरे समाज और उच्च शिक्षा व्यवस्था के सामने है।



