पूणेराजनीति

उपमुख्यमंत्री के काफिले में निलंबित पुलिस अधिकारी कैसे?

उपमुख्यमंत्री के काफिले में निलंबित पुलिस अधिकारी कैसे?

 

बसपा प्रदेश महासचिव डॉ. हुलगेश चलवादी का सवाल एकनाथ शिंदे से स्पष्टीकरण की मांग

 

पुणे:परभणी में संविधान की प्रतिकृति के अपमान के बाद भीमसैनिकों पर पुलिस द्वारा किए गए अत्याचारों के जख्म अभी भी ताजा हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले में हस्तक्षेप कर दोषी पुलिस अधिकारी को निलंबित कर आंबेडकरी अनुयायियों की भावनाओं पर मरहम लगाने का सरकारी प्रयास किया था। लेकिन क्या उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इन जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं? परभणी मामले में निलंबित एलसीबी पुलिस निरीक्षक अशोक घोरबांड को सरकार का संरक्षण प्राप्त है क्या? ऐसे चौंकाने वाले सवाल बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव एवं पश्चिम महाराष्ट्र प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवादी ने आज, रविवार (9 फरवरी) को उठाए।

 

परभणी की घटना के विरोध में आंदोलन करने वाले भीमसैनिक सोमनाथ सूर्यवंशी की मौत के बाद अशोक घोरबांड को निलंबित किया गया था। इसके बावजूद यदि यह निलंबित पुलिस अधिकारी उपमुख्यमंत्री शिंदे के काफिले में नजर आ रहा है, तो यह गंभीर विषय है। क्या इस अधिकारी पर सरकार की कृपा है? इस संदर्भ में डॉ. चलवादी ने सवाल उठाया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के संबंध में उपमुख्यमंत्री शिंदे को स्पष्टीकरण देना चाहिए, ऐसी मांग भी डॉ. चलवादी ने की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोमनाथ मामले का उपयोग सत्ताधारी दलों द्वारा राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं किया जाना चाहिए और बसपा इस पर स्पष्ट रुख रखती है।

 

दोषियों पर हत्या का मामला दर्ज करें!

 

सूर्यवंशी मौत मामले में कुछ और पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है, लेकिन उनके खिलाफ अभी तक गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज नहीं किया गया है। हाल ही में सरकार ने पुलिस उपनिरीक्षक कार्तिकेश्वर तुरनर, पुलिसकर्मी सतीश दैठणकर, मोहित पठान और राजेश जठाल को निलंबित किया है। यह कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन दोषियों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की आंबेडकरी अनुयायियों की मांग अब तक पूरी नहीं हुई है। इन सभी पर मामला दर्ज कर उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाए, ऐसी मांग डॉ. चलवादी ने की है।

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