संपादकीय: इटावा नगर पालिका परिषद को उठते सवालों का जवाब देना चाहिए
इटावा नगर पालिका परिषद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। विकास कार्यों से जुड़े कुछ दस्तावेजों और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों ने आम नागरिकों के मन में कई जिज्ञासाएं पैदा कर दी हैं। जब सड़क, नाली, इंटरलॉकिंग, जल निकासी या अन्य विकास कार्यों पर जनता का करोड़ों रुपये का धन खर्च होता है, तब यह स्वाभाविक है कि लोग जानना चाहें कि कार्य किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत हुए, किस एजेंसी ने उन्हें पूरा किया, भुगतान किन आधारों पर हुआ और क्या निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं।
लोकतंत्र में किसी भी सरकारी संस्था की सबसे बड़ी पूंजी जनता का विश्वास होता है। यह विश्वास केवल विकास कार्यों के उद्घाटन से नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही से बनता है। यदि किसी कार्य को लेकर सवाल उठते हैं तो उनका उत्तर तथ्यों और अभिलेखों के माध्यम से दिया जाना चाहिए। पारदर्शिता हमेशा संस्था की विश्वसनीयता बढ़ाती है, जबकि लंबे समय तक बनी चुप्पी अनावश्यक शंकाओं को जन्म देती है।
विशाल समाचार द्वारा पिछले लगभग दो वर्षों से नगर पालिका परिषद इटावा के विभिन्न मामलों में संबंधित अधिकारियों और चेयरमैन से लगातार जानकारी एवं आधिकारिक पक्ष जानने का प्रयास किया जाता रहा है। व्हाट्सएप संदेश, फोन कॉल और अन्य माध्यमों से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। हाल ही में 100 मीटर सड़क और 100 मीटर नाली निर्माण कार्य से संबंधित दस्तावेजों और जानकारी पर भी प्रतिक्रिया मांगी गई, किंतु अब तक कोई आधिकारिक उत्तर सामने नहीं आया। किसी भी सार्वजनिक संस्था के लिए यह स्थिति उचित नहीं कही जा सकती।
यह स्पष्ट करना भी आवश्यक है कि केवल दस्तावेज सामने आ जाना किसी अनियमितता का अंतिम प्रमाण नहीं होता। दस्तावेजों की सत्यता, जमीनी स्थिति और संबंधित पक्ष का जवाब—तीनों मिलकर ही पूरी तस्वीर सामने लाते हैं। इसलिए निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों को सुनना लोकतांत्रिक और पत्रकारिता दोनों की मूल भावना है। इसी सिद्धांत का पालन करते हुए विशाल समाचार दस्तावेजों का परीक्षण और स्थल सत्यापन कर रहा है।
यदि इटावा नगर पालिका परिषद के सभी विकास कार्य नियमानुसार हुए हैं, तो परिषद को स्वयं आगे आकर रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और उठ रहे सवालों का जवाब देने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। इससे जनता का भरोसा और मजबूत होगा। वहीं यदि कहीं कोई प्रक्रिया संबंधी त्रुटि या अनियमितता सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय होना भी उतना ही आवश्यक है। जवाबदेही से भागना किसी भी लोकतांत्रिक संस्था के हित में नहीं होता।
पत्रकारिता का उद्देश्य किसी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था को कठघरे में खड़ा करना नहीं, बल्कि जनहित से जुड़े तथ्यों को सामने लाना है। इसी प्रकार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का दायित्व भी है कि वे जनता और मीडिया के प्रश्नों का समय पर तथ्यात्मक उत्तर दें। आखिरकार, विकास कार्य जनता के धन से होते हैं और जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसका पैसा किस प्रकार और कितनी पारदर्शिता के साथ खर्च किया गया।
इटावा नगर पालिका परिषद के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती केवल विकास कार्य कराना नहीं, बल्कि उन कार्यों पर जनता का भरोसा बनाए रखना भी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि परिषद, संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि जल्द ही सामने आकर सभी तथ्यों को सार्वजनिक करेंगे। पारदर्शिता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है और यही किसी भी सार्वजनिक संस्था की विश्वसनीयता का सबसे मजबूत आधार भी।
संपादकीय विभाग विशाल समाचार


