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देश को आगे ले जाने के लिए युवा शक्ति की जरूरत

देश को आगे ले जाने के लिए युवा शक्ति की जरूरत

भारतीय छात्र संसद के समापन पर दत्तात्रय भरणे की अपीलः राजनीति में युवा प्रवेश करे

 

पुणे: हमारे देश की असली ताकत युवा है. देश और राज्य को आगे ले जाने की जिम्मेदारी इन युवाओं पर है और इसके लिए देश को युवा शक्ति की जरूरत है. ऐसे विचार राज्य के क्रीडा एवं युवा कल्याण मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने व्यक्त किए. भरणे ने युवाओं से अपील की कि जीवन में कंजूस मत बनो, आत्मविश्वास रखो, इच्छाशक्ति के बल पर आप सब कुछ हासिल कर सकते है.

एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी पुणे और एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट, पुणे द्वारा आयोजित १४वीं भारतीय छात्र संसद के समापन मौके पर वे बतौर मुख्य अतिथि के रुप में बोल रहे थे. इस समय मेघालय विधानसभा अध्यक्ष थॉमस संगमा, राज्यसभा टीवी चैनल के पूर्व कार्यकारी निदेशक राजेश बादल, एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कार्याध्यक्ष एवं छात्र संसद के संस्थापक डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड और कुलपति डॉ. आर.एम.चिटणीस उपस्थित थे.

दत्तात्रेय भरणे ने कहा, युवाओं को राजनीति में प्रवेश करना चाहिए .कुछ डॉक्टर, कुछ इंजीनियर बनेंगे कोई अन्य क्षेत्र में जाएंगे. हम राजनीति के माध्यम से लोगों की सेवा कर सकते है. ऐसा प्रतीत होता है कि शहरी युवा राजनीति के प्रति नकारात्मक हैं. युवाओं को यह नहीं मानना चाहिए कि चूकि राजनीति में कुछ लोग गलत है, इसका मतलब यह है कि सभी राजनेता गलत है.

आंदोलन से उभरकर आनेवाला नेता राज्य और देश का नेतृत्व करता है. मेरे परिवार में कोई राजनीतिक विरासत नहीं है. मैं अपने कॉलेज के दिनों में एक युवा संगठन के माध्यम से सामुदायिक जीवन में सक्रिय हो गया. मैं वहं से आया हूं. इसमें कडी मेहनत लगती है. भरणे ने यह भी कहा कि युवाओं को कडी मेहनत करनी चाहिए वे निश्चित रूप से सफल होंगे.

डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड ने कहा, भारतीय छात्र संसद एक ऐसी पहल है जो लोकतंत्र में नेतृत्व के लिए अवसर प्रदान करती है. यह शिक्षा संस्थान राजनीति में प्रशिक्षण देने वाला पहला शैक्षणिक संस्थान है. हमारा प्रयास है कि अच्छे और शिक्षित युवा राजनीति में आए. पिछले २० वर्षों में हमने युवाओं के मन मे यह बात बिठाई है कि राजनीति अच्छी चीज है.

आगे उन्हों ने कहा, यदि युवा समाज की आवश्यकताओं की पहचान नहीं कर सकते, तो उनकी अर्जित डिग्रियां समाज के लिए लाभकारी नहीं होगी. इसे ध्यान में रखते हुए हम सामाजिक रूप से उपयोगी स्नातक युवाओं का निर्माण कर रहे हैं ।

 

 

थॉमस संगमा ने कहा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सोशल मीडिया के उपयोग के प्रति संतुलित दृष्टिकोण होना चाहिए. इसके लिए एक ऐसी नीति की आवश्यकता है जो पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करें, उपयोगकर्ता की जानकारी की सुरक्षा करे और समय रहते गलत सूचना के प्रसार पर अंकुश लगाए.

राजेश बादल ने कहा, भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करेगा. सरकारने भी इस क्षेत्र के विकास के लिए सब्सिडी प्रदान की है. डर भी यह लगता है कि मनुष्य एमआई को नियंत्रित करते है, लेकिन कुछ वर्षों में एआई मनुष्यों को नियंत्रित कर लेगा. भविष्य में मानव सभ्यता समाप्त हो जाएगा. इसे ध्यान में रखते हुए सकारात्मक परिवर्तन के लिए एआइृ का उपयोग किया जाना चाहिए.

सूत्रसंचालन प्रा.डॉ. गौतम बापट ने किया.

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