
मत्स्यव्यवसाय विभाग को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना आवश्यक – मत्स्यव्यवसाय व बंदरगाह मंत्री नितेश राणे
पुणे,: महाराष्ट्र राज्य में मत्स्यव्यवसाय विभाग एक महत्वपूर्ण विभाग है और इसे आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए अधिकारियों को एकजुट होकर प्रयास करना होगा। साथ ही, पश्चिम महाराष्ट्र में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए भी ठोस कदम उठाने होंगे, ऐसा प्रतिपादन मत्स्यव्यवसाय और बंदरगाह विभाग के मंत्री नितेश राणे ने किया।
पुणे स्थित जिलाधिकारी कार्यालय में विभागीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें मंत्री श्री राणे ने अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। इस बैठक में जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी, मत्स्य विभाग के आयुक्त किशोर तावडे (भा.प्र.से.), प्रादेशिक उपायुक्त विजय शिखरे और संबंधित पांच जिलों के सहायक आयुक्त उपस्थित थे।
मंत्री श्री राणे ने कहा कि पश्चिम महाराष्ट्र में मत्स्य व्यवसाय के लिए अनुकूल वातावरण है और इस क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों को इस व्यवसाय में जोड़कर उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों से आपसी समन्वय से पारदर्शिता के साथ कार्य करने और विभाग को आत्मनिर्भर बनाने पर बल दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि विभाग में नवाचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग प्रारंभ किया जाना चाहिए। आंध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में चल रहे सफल उपक्रमों का अध्ययन कर, महाराष्ट्र में भी ऐसे प्रयोग लागू किए जाने चाहिए।
बैठक में बताया गया कि सभी तालाबों की गाद निकासी हेतु समयबद्ध योजना बनाई जाएगी, जिससे मत्स्य उत्पादन में बढ़ोतरी संभव होगी। मत्स्य व्यवसाय को अब कृषि उद्योग का दर्जा मिला है, इसलिए जलप्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण के लिए संबंधित विभागों के साथ मिलकर योजना बनाई जाएगी।
जिन जिलों में मछली बाजार के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है, वहां नगरपालिकाओं से समन्वय कर भूमि प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, पुराने बाजारों के नवीनीकरण हेतु मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने के लिए भी कहा गया। प्रस्तावों में कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए।
मंत्री श्री राणे ने तालाबों में कार्यरत ठेकेदारों की निगरानी और अयोग्य ठेकेदारों के अनुबंध समाप्त करने के निर्देश भी दिए। उजनी बांध में हो रही अवैध मत्स्याखेट को रोककर स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने का भी आदेश दिया गया।
पुणे के हडपसर क्षेत्र में आधुनिक मछलीघर निर्माण पर भी बैठक में विशेष चर्चा की गई।
बैठक में पुणे, सातारा, सांगली, कोल्हापुर और सोलापुर जिलों के मत्स्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।



