
बुद्ध पूर्णिमा पर आयोजित ‘तूफान में दीपक’ कार्यक्रम ने पुणेवासियों को किया मंत्रमुग्ध
विश्वभूषण डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर सांस्कृतिक महोत्सव समिति द्वारा आयोजित ‘धम्म संध्या’ कार्यक्रम को मिला उत्स्फूर्त प्रतिसाद
पुणे : बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित ‘धम्म संध्या’ कार्यक्रम में लोकगायक डॉ. गणेश चंदनशिवे और अजय देहाडे की पहाड़ी और प्रभावशाली आवाज़ में प्रस्तुत एक से बढ़कर एक धम्म और भीम गीतों ने उपस्थित उपासक-उपासिकाओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
यह कार्यक्रम विश्वभूषण डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर सांस्कृतिक महोत्सव समिति, पुणे तथा परशुराम वाडेकर और पूर्व उपमहापौर सुनीता वाडेकर के नेतृत्व में, दीपक म्हस्के की संकल्पना के अंतर्गत आयोजित किया गया था। यह संगीतमय ‘धम्म संध्या’ सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय परिसर स्थित जनरल जोशी गेट के पास ‘तथागत गौतम बुद्ध विपश्यना विहार’ में बड़े ही उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ।
इस अवसर पर सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के प्र-कुलगुरु पराग कालकर, डॉ. विजय खरे, जितेंद्र पानपाटील, सत्यम गाडे, पुणे के प्रमुख बुद्ध विहारों के प्रतिनिधि, राजनैतिक और सामाजिक क्षेत्र के अनेक गणमान्य अतिथि, अधिकारी और बड़ी संख्या में उपासक-उपासिकाएं उपस्थित थीं। विहार को बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष्य में विशेष रूप से सजाया गया था।
कार्यक्रम में डॉ. गणेश चंदनशिवे और अजय देहाडे ने “उजाड़ रानी किमया केलीस मोठी”, “भीमा तुज प्रणाम कोटी-कोटी”, “गौतम बुद्धांचा संदेश सांगू चला रं”, “हे भीमराया रामजी तनया”, “गुलामी का टूट गया जाल ये है मेरे भीम का कमाल” जैसे कई सशक्त और भावपूर्ण गीतों की प्रस्तुति दी। उन्हें साज-सज्जा से सुसज्जित वाद्यवृंद की तालमेल से भरपूर संगत प्राप्त हुई। सभी गीतों पर उपस्थित श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट और हाथ उठाकर भरपूर सराहना की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. गणेश चंदनशिवे ने कहा कि पुणे जैसे सांस्कृतिक शहर में आंबेडकरी आंदोलन के साहित्यकारों और कलाकारों को मंच प्रदान करने का कार्य परशुराम वाडेकर कर रहे हैं। धम्म पहाट, धम्म संध्या, बाबासाहेब अंबेडकर जयंती, सम्यक साहित्य सम्मेलन, संविधान दौड़ और संविधान सम्मान सम्मेलन जैसे विविध आयोजनों के माध्यम से उनका कार्य प्रशंसनीय और आंबेडकरी विचारधारा को आगे बढ़ाने वाला है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी अतिथियों और उपासक-उपासिकाओं को प्रसाद स्वरूप खीर वितरित की गई। इस संगीतमय संध्या ने बुद्ध पूर्णिमा को एक नया उत्साह और आध्यात्मिक आनंद प्रदान किया। कार्यक्रम की सफलता के लिए समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने अथक परिश्रम किया। कार्यक्रम का संचालन समिति के सचिव दीपक म्हस्के ने किया।


