
पुणे: शिक्षा विभाग में आरटीई फीस प्रतिपूर्ति घोटाला, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग :- डॉ हुलगेश चलवादी
पुणे, डीएस तोमर
पुणे जिला परिषद के शिक्षा विभाग में आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत 25% फीस प्रतिपूर्ति प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप सामने आया है। खबरों के अनुसार, निजी स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति देने के लिए विभाग के कुछ अधिकारी 10% कमीशन मांग रहे हैं। जब तक यह कमीशन नहीं दिया जाता, तब तक स्कूलों को उनका पैसा नहीं मिलता। इस गंभीर आरोप को लेकर बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव डॉ. हुलगेश चलवादी ने मुख्यमंत्री सचिवालय, विभागीय आयुक्त कार्यालय और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने दोषी अधिकारियों – हनुमंत कोलगे और गोरक्षनाथ हिंगणे – पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर निलंबन की मांग की है।
डॉ. चलवादी ने आरोप लगाया कि आरटीई के तहत मिलने वाली फीस प्रतिपूर्ति की राशि समय पर वितरित नहीं की जाती, बल्कि उसे अलग खाते में डालकर जानबूझकर देरी की जाती है। सेवा गारंटी कानून के अनुसार, यह राशि 15 दिनों के भीतर वितरित होनी चाहिए, लेकिन पिछले एक साल से कई स्कूलों को उनका पैसा नहीं मिला है। इससे पहले भी फर्जी शिक्षक भर्ती और फर्जी छात्र आईडी मामलों में कुछ अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन विभागीय स्तर पर भ्रष्टाचार रोकने के लिए ठोस उपाय नहीं किए गए हैं।
शिकायत में यह भी कहा गया कि प्रतिपूर्ति के लिए स्कूलों से बार-बार नए प्रस्ताव मांगे जाते हैं, छोटी-छोटी त्रुटियां बताकर भुगतान में बाधा डाली जाती है और कुछ चुनिंदा स्कूलों को ही पूरी राशि दी जाती है, जबकि बाकी स्कूलों को वंचित रखा जाता है। डॉ. चलवादी ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों की सीसीटीवी और कॉल डिटेल्स की जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा, प्रतिपूर्ति से संबंधित प्रस्ताव और बिलों की जानकारी भी जानबूझकर जिला परिषद की वेबसाइट पर प्रकाशित नहीं की गई है। पिछले साल और इस साल का फंड मार्च 2024 और मार्च 2025 तक खर्च न कर शेष रखा गया है। डॉ. चलवादी ने इस पूरे मामले में पारदर्शिता लाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
आरटीई फीस प्रतिपूर्ति में देरी और अनियमितता पर राज्य सरकार की आलोचना
विभिन्न संगठनों और स्कूल संचालकों ने भी आरटीई प्रतिपूर्ति में देरी और अनियमितता को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की है। कई स्कूल संचालकों ने शिक्षा विभाग से सात सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने, गणवेश राशि बढ़ाने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांगें शामिल हैं।
पुणे के शिक्षा विभाग में आरटीई फीस प्रतिपूर्ति के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार औरअनियमितताओं के आरोप लगे हैं। स्कूल संचालकों और सामाजिक संगठनों ने दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है। मामला राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।



