करोड़ों की बेशकीमती सरकारी जमीनों पर पूंजीपतियों का कब्जा, बना व्यापार अड्डा..इस समस्या का क्या हुआ प्रशासन मिडिया में सार्वजनिक करें
विशाल समाचार| उधमपुर
गरीब जनता होती अतिक्रमण का शिकार, पूंजीपतियों का फल-फूल रहा व्यापार। जनपद उधमपुर के मुख्यतम राजमार्ग, पुलिस से लेकर महकमा चौक तक की सड़क के दोनों ओर की बहुमूल्य और बेशकीमती सरकारी जमीनों पर पूंजीपतियों ने कब्जा जमा रखा है और नगर परिषद प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
प्रशासन की लापरवाही से फल-फूल रहा कब्जा
नगर परिषद द्वारा अवैध कब्जों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में कार्रवाई सिर्फ गरीबों की झुग्गियों तक ही सीमित रहती है। बड़े व्यापारियों और रसूखदारों पर प्रशासन का बुलडोजर नहीं चलता।
नगर पालिका परिषद गंगनाथ के कर्मचारियों के समय-समय पर किए गए निरीक्षणों के बावजूद, अवैध कब्जे जस के तस बने हुए हैं। 25.07.2019 को गठित एक टीम द्वारा ग्राम मझरा में भूमि का निरीक्षण किया गया, जिसमें पाया गया कि कुल 4 बड़े भूखंडों में से तीन योजनाबद्ध रूप से कब्जे में हैं। कुल 142.50 वर्ग मीटर तथा एक भूखंड प्लॉट रखकर 126 वर्ग मीटर भूमि पर कब्जा पाया गया।
रिपोर्ट में खुलासा
टीम द्वारा दी गई रिपोर्ट में कहा गया कि ग्राम मझरा में कुल 796 वर्ग मीटर भूमि पर अवैध कब्जा है, जिसमें 288 वर्ग मीटर पर व्यवसायिक इमारतें बनी हुई हैं। इसके बाद 640 वर्ग मीटर भूमि पर भी अवैध निर्माण पाए गए। प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, कुल रास्ते में 72 वर्ग मीटर भूमि पर भी कब्जा है, जिसमें सड़क पर 120 वर्ग मीटर तक कब्जा है।
कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति
इस प्रकार गाथा संख्या चार का संज्ञान कई कमेटियों तक समय-समय पर पहुंचाया गया, लेकिन कार्रवाई न के बराबर रही। उप जिलाधिकारी और जिलाधिकारी को भी रिपोर्ट भेजी गई थी, जिसमें 03/08/2019 को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि “बचाव कार्यवाही शून्य” रही है।
गरीबों के हक पर डाका
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा कब्जा संभव नहीं है। गरीब जनता को आवास और रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं पूंजीपति वर्ग सरकारी जमीनों पर आलीशान व्यापारिक इमारतें खड़ी कर मुनाफा कमा रहे हैं। बुलडोजर गरीबों की झुग्गियों पर ही चलता है, मगर इन रसूखदारों पर प्रशासन की नजरें इनायत बनी रहती हैं।
सवालों के घेरे में प्रशासन
आखिर क्यों नहीं हो रही अवैध कब्जों पर कार्रवाई?
क्या प्रशासन की मिलीभगत से फल-फूल रहा है यह व्यापार?
गरीबों के हक की जमीनें कब तक रहेगीं कब्जे में?
जनता में आक्रोश
स्थानीय लोगों में इस मुद्दे को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। प्रशासन को चाहिए कि वह बिना किसी भेदभाव के अवैध कब्जों को हटाए और सरकारी जमीनों को गरीबों के हक में बहाल करे।
सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह गरीब जनता के अधिकारों का भी हनन है। प्रशासन को तत्काल प्रभाव से निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि न्याय और व्यवस्था दोनों कायम रह सके।



