
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों डॉ. प्रमोद चौधरी द्वारा लिखित ‘पैलतीरावरून… तर असं झालं’ पुस्तक का विमोचन
पुणे, डीएस तोमर
भारत के भविष्य की दिशा और कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन डॉ. प्रमोद चौधरी की पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है। इसमें व्यक्त किए गए विचार और अनुभव नवउद्यमियों तथा देश के लिए कुछ करने की इच्छा रखने वालों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगे, ऐसा विश्वास मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री श्री. फडणवीस के हाथों डॉ. प्रमोद चौधरी के उद्यमी सफर पर आधारित ‘पैलतीरावरून… तर असं झालं’ पुस्तक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राज्य के उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटिल, प्राज इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और पुस्तक के लेखक डॉ. प्रमोद चौधरी, भारतीय मराठी साहित्य मंडल के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद जोशी, प्रकाशक विकास सोनी, अतुल मुळे आदि उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री. फडणवीस ने कहा कि डॉ. प्रमोद चौधरी जैसे नवाचार के प्रति समर्पित शोधकर्ता की पुस्तक का विमोचन करते हुए उन्हें खुशी हो रही है। पुस्तक के अवलोकन के दौरान उनके जीवन और संघर्ष के साथ-साथ अगली पीढ़ी के लिए व्यक्त किए गए विचार महत्वपूर्ण प्रतीत होते हैं। किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व उसके विचारों से झलकता है। इस पुस्तक से डॉ. चौधरी के जीवन मूल्यों और कठिन परिस्थितियों में अर्जित सफलता की जानकारी मिलती है। गुणवत्ता, तकनीक, विश्वास और ईमानदारी के बल पर उन्होंने उद्योग जगत में सफलता प्राप्त की।
पुस्तक में 2009 से 2014 के संघर्षपूर्ण काल में उद्योग की स्थिति का वर्णन किया गया है। इथेनॉल के संदर्भ में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के समय अनुकूल निर्णय लिया गया। बाद में आई चुनौतियों का डॉ. चौधरी ने नए उपायों से सफलतापूर्वक सामना किया। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में इथेनॉल नीति को और अधिक अनुकूल बनाया गया। डॉ. चौधरी के सुझावों के अनुसार इसमें और सुधार किए गए, जिससे 20% तक इथेनॉल मिश्रण का निर्णय लिया गया। इससे एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का विदेशी मुद्रा बचाया जा सका। इस आत्मनिर्भरता के सपने को तकनीक और सहयोग प्राज ने उपलब्ध कराया, ऐसा उल्लेख श्री. फडणवीस ने किया।
उन्होंने आगे कहा कि टू-जी इथेनॉल से कृषि क्रांति संभव हुई और किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से प्रगति हुई। चीनी उद्योग की समस्याओं के समाधान के लिए नई तकनीक देने और उद्योग को आगे बढ़ाने में प्राज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्राज के माध्यम से सह-उत्पादों की अर्थव्यवस्था खड़ी हुई है। स्वच्छ विमान ईंधन के निर्माण में भी प्राज का योगदान उल्लेखनीय है। डॉ. चौधरी के प्रयासों से सीबीजी नीति तय करने में मदद मिली, जिससे नई अर्थव्यवस्था का निर्माण हो रहा है।
देश के सामने प्लास्टिक की समस्या बहुत बड़ी है। अपघटनशील प्लास्टिक के विघटन की तकनीक प्राज में विकसित की जा रही है। इस पर आधारित उद्योग देश में स्थापित करने के लिए डॉ. चौधरी के मार्गदर्शन से अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को लाभ होगा, ऐसा विश्वास श्री. फडणवीस ने व्यक्त किया। उन्होंने डॉ. चौधरी के राष्ट्रहित में जारी कार्य के लिए शुभकामनाएँ भी दीं।
प्रो. जोशी ने कहा कि भाषा और उद्योग का गहरा संबंध है। वैश्विक स्तर पर मराठी उद्यमियों की सफलता मराठी भाषा का सम्मान है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए चौधरी की यह सफलता युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। जैव ईंधन और जैव गैस के क्षेत्र में डॉ. चौधरी का योगदान बहुमूल्य है, जिससे देश की खनिज ईंधन पर निर्भरता कम हुई है। नवाचार के प्रति समर्पित और भविष्यद्रष्टा उद्यमी के रूप में वे युवाओं की आकांक्षाओं को जागृत करते हैं और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, यह पुस्तक इसी का प्रमाण है।
लेखक डॉ. चौधरी ने पुस्तक के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में देश में जैव ईंधन के विकास को गति मिली है। इस विकास के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी पुस्तक में दी गई है। आगे भी जैव ईंधन के अधिक उपयोग के लिए प्रयास किए जाएंगे। सरकार द्वारा भी इस दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम कर पर्यावरण को बड़ा लाभ होगा। एनर्जी ट्रांजिशन के लिए प्राज की ओर से प्रयास जारी हैं।
प्रकाशक श्री. सोनी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में विधायक सिद्धार्थ शिरोले, हेमंत रासने, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरेश गोसावी आदि उपस्थित थे।


