डिजिटल, विविधतापूर्ण और मांग-संचालित भारत का कौशल अभियान हासिल कर रहा है नई उपलब्धियां
पुणे: कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने मंत्री जयंत चौधरी के सतत मार्गदर्शन में, भारत के कार्यबल की संभावनाओं को नया स्वरूप दिया है और 1.5 करोड़ से अधिक लोगों को उल्लेखनीय कौशल प्रदान कर सशक्त बनाया है।
यह उपलब्धि नीतिगत सुधार, उद्योग भागीदारी और गहरी सामुदायिक पहुंच के मिश्रण से हासिल हुई। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाय 4.0) की बात करें तो इसके तहत 1.63 करोड़ से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया गया, जिनमें से कई इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और स्वास्थ्य सेवा जैसे भविष्य के लिए तैयार क्षेत्रों में प्रशिक्षित किए गए हैं। इसी तरह, राष्ट्रीय प्रशिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) ने 1.5 लाख व्यवसायों में 8.7 लाख से अधिक प्रशिक्षुओं को रखा है, जो व्यावहारिक, नौकरी करते हुए (ऑन-द-जॉब) सीखने की दिशा में एक दृढ़ कदम को दर्शाता है।
इस आंदोलन की प्रमुख ताकत महिलाओं की बढ़ती भागीदारी रही है। जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) योजना के ज़रिये 5.05 लाख से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया गया है – उनमें से 80% महिलाएं हैं। सिलाई और सौंदर्य सेवाओं से लेकर डिजिटल कौशल तक, देश भर में महिलाएं बढ़ते आत्मविश्वास और क्षमता के साथ कार्यबल में कदम रख रही हैं।
अप्रेंटिसशिप को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए, सरकार ने वज़ीफे में 36% की बढ़ोतरी को मंज़ूरी दी, जो अब ₹6,800 से बढ़कर ₹12,300 प्रति माह हो गया है। इसमें मुद्रास्फीति के आधार पर हर दो साल में समायोजन भी किया जाता है। यह व्यावहारिक समर्थन ड्रॉपआउट (बीच में छोड़कर जाने की दर) कम करने और विशेष रूप से कम आय वाले परिवारों के लिए अप्रेंटिसशिप को और अधिक व्यवहार्य विकल्प बनाने में मदद कर रहा है।
इससे सिर्फ लोगों में ही नहीं बल्कि संस्थानों में भी बदलाव आया है। पारंपरिक आईटीआई को स्मार्ट क्लासरूम और अपडेटेड पाठ्यक्रम के साथ अपग्रेड किया जा रहा है। आईटीआई अपग्रेडेशन के लिए ₹60,000 करोड़ की राष्ट्रीय योजना के साथ एक बड़ी छलांग आई है, जो 1,000 आईटीआई का आधुनिकीकरण करेगी और पांच राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करेगी। इन्हें तेज़ी से विकसित हो रहे जॉब मार्केट की मांगों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है।
इस बदलाव का एक बड़ा हिस्सा डिजिटल भी है। स्किल इंडिया डिजिटल हब (एसआईडीएच) एक शक्तिशाली प्लेटफॉर्म के रूप में उभरा है जिसके 1 करोड़ से ज़्यादा उपयोगकर्ता हैं और यहां 50 लाख कोर्स पूरे किये गए हैं। यहां एआई, ड्रोन तकनीक, क्लाउड कंप्यूटिंग के अलावा विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रदान किया जाता है। पोर्टल अब पीएम विश्वकर्मा, जेएसएस और यहां तक कि ग्रीन हाइड्रोजन प्रशिक्षण जैसी प्रमुख योजनाओं के साथ जुड़ा है, जो देश के सबसे दूरदराज़ के इलाकों में हाई-टेक शिक्षा पेश कर रहा है।
एसआईडीएच प्रमाणन में विश्वास और पारदर्शिता भी बढ़ा रहा है। नए एनसीवीईटी -प्रमाणित डिजिटल प्रमाण पत्र (क्रेडेंशियल) में अब क्यूआर कोड, एनएसक्यूएफ लेवल, फोटो और सुरक्षित हस्ताक्षरकर्ता शामिल हैं – जिससे प्रमाणपत्रों को सत्यापित करना आसान हो गया है और नियोक्ताओं के लिए अधिक उपयोगी हो गया है। मोबाइल ओटीपी और आधार ई-केवाईसी का उपयोग कर जेएसएस संस्थानों को एसआईडीएच में शामिल करने से पंजीकरण सरल और विस्तार योग्य हो गया है।
ज़मीनी स्तर पर, बिजनौर और भरतपुर में कौशल महोत्सव जैसे आयोजनों में ऊर्जा दिखाई देती है। 17,000 से अधिक पंजीकरण और मौके पर 3,000 से अधिक प्लेसमेंट के साथ, ये आयोजन केवल रोज़गार से ही जुड़े नहीं हैं बल्कि वे बड़े पैमाने पर आशा पैदा करते हैं।
नीतिगत स्तर पर, और अधिक अवसर पेश किये जा रहे हैं। मॉडल कौशल ऋण योजना को उच्च क्रेडिट कैप के साथ फिर से शुरू किया गया – ₹1.5 लाख से बढ़ाकर ₹7.5 लाख – और अब इसमें एनबीएफसी और गैर-एनएसक्यूएफ पाठ्यक्रम शामिल हैं, जिससे अधिक युवाओं को निजी संस्थानों से भी उच्च-गुणवत्ता वाले प्रशि
इस प्रक्रिया को उद्योग के अनुरूप बनाने के प्रति कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री, जयंत चौधरी की प्रतिबद्धता ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी को भी बढ़ाया है। पीएमकेवीवाय 4.0 के तहत, एयर इंडिया एसएटीएस, फ्लिपकार्ट और स्विगी के साथ सहयोग गारंटीशुदा प्लेसमेंट के साथ सह-भुगतान कौशल को सक्षम कर रहा है। और इस परितंत्र को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए, एचएएल, आईसीटी अकादमी और एनएसी के साथ टीओटी कार्यक्रमों के तहत 8,000 नए प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
संस्थागत विकास तेज़ी हो रहा है। मुंबई और अहमदाबाद में दो भारतीय कौशल संस्थान (आईआईएस) ने परिचालन शुरू कर दिया है, जिसका पहला बैच अक्टूबर 2024 में पढ़ाई पूरी कर निकला है। इसके अलावा 200 आईटीआई को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है और स्पोक-हब मॉडल में 800 और शामिल किए जाएंगे। एआई प्रोग्रामिंग असिस्टेंट जैसे पायलट कार्यक्रम, जो अब 19 एनएसटीआई में चल रहे हैं, कल के कौशल परिदृश्य की एक झलक पेश करते हैं
भारत के कौशल विकास प्रयासों को वैश्विक मान्यता भी मिल रही है। जर्मनी और सिंगापुर के साथ नए सिरे से किए गए समझौता ज्ञापन और दावोस में विश्व आर्थिक मंच में मंत्रालय की उपस्थिति वैश्विक कार्यबल मानकों के भविष्य को आकार देने में भारत की बढ़ती भूमिका को उजागर करती है। माइक्रोसॉफ्ट के साथ बेहतरीन साझेदारी है – एआई करियर्स फॉर वूमेन पहल टियर-2 और टियर-3 शहरों में 20,000 महिलाओं को प्रशिक्षित करेगी और इस तरह नवोन्मेष और समावेश, दोनों ही संभव होगा।
इन सभी उपलब्धियों के बीच, यह बात स्पष्ट रूप से उभरती है कि यह सिर्फ गतिविधियों भरा साल ही नहीं है बल्कि यह दीर्घकालिक बदलाव की शुरुआत का प्रतीक है। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री, जयंत चौधरी के समावेशी और सुधार-संचालित नेतृत्व ने कौशल को अधिक सुलभ, बाज़ार-प्रासंगिक और भविष्य के लिए तैयार बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है।
नीतिगत सुधार से लेकर डिजिटल नवोन्मेष तक, और महिलाओं के नेतृत्व वाली प्रगति से लेकर वैश्विक सहयोग तक, मंत्रालय का काम अब सिर्फ प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह जीवन को नई दिशा देने से भी जुड़ा है …. और लगता है कि यह यात्रा अभी शुरू ही हुई है।


