
सीतामढ़ी: संभावित बाढ़–2025 से निपटने के लिए उच्च स्तरीय बैठक, आपदा प्रबंधन को लेकर कड़े निर्देश
जिलाधिकारी श्री रिची पांडेय की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक
सीतामढ़ी, कुणाल किशोर सीतामढ़ी
संभावित बाढ़–2025 की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने और आपातकालीन प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी सीतामढ़ी, श्री रिची पांडेय की अध्यक्षता में आज विमर्श सभा कक्ष में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन बृजकिशोर पांडे, सिविल सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, जिला जन संपर्क पदाधिकारी, तकनीकी विभागों के कार्यपालक अभियंता, कार्य एजेंसी के प्रतिनिधि एवं संवेदक, जिला स्तरीय अन्य सभी पदाधिकारी उपस्थित थे। अंचल स्तरीय सभी पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।
बाढ़ प्रबंधन के लिए पूर्व तैयारी के निर्देश
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में जनहानि को रोकने एवं न्यूनतम क्षति सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन हर संभव पूर्व तैयारी सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने आपदा प्रबंधन शाखा को निर्देशित किया कि इंटर डिपार्टमेंटल कोऑर्डिनेशन के द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, राहत एवं बचाव कार्यों के त्वरित निष्पादन एवं संसाधनों की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
विभागीय समन्वय और मॉक ड्रिल पर जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि आपदा की घड़ी में एसडीआरएफ/एनडीआरएफ, सिविल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग एवं अन्य विभागों के बीच तालमेल ही त्वरित और प्रभावी बचाव कार्य की कुंजी है। उन्होंने आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल के तहत मॉक ड्रिल आयोजित करने और जन-जागरूकता अभियानों को तेज करने पर भी जोर दिया।
तटबंध सुरक्षा एवं राहत शिविरों की व्यवस्था
जिलाधिकारी ने तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, निरंतर सर्वेक्षण करने और कमजोर स्थलों की मरम्मत के लिए सभी संबंधित अभियंताओं को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राहत शिविरों की स्थापना, पीने के पानी, आवश्यक दवाओं, चिकित्सा सुविधा, भोजन एवं शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की पूर्व व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सभी अंचल अधिकारी व आपदा प्रबंधन टीमों को सतर्क रहने और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था सक्रिय रखने का निर्देश दिया गया।

नोडल अधिकारी एवं पंचायत स्तर पर पर्यवेक्षक की नियुक्ति
जिलाधिकारी ने संभावित बाढ़ प्रबंधन हेतु अलग-अलग कार्यों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने तथा पंचायत स्तर पर पर्यवेक्षक पदाधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया। संबंधित विभागों के अभियंताओं को तटबंध सुरक्षा के लिए पूरी मुस्तैदी से कार्य करने और अंचल अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए। किसी भी तरह की शिकायत पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
आपदा प्रबंधन की तैयारियों का विवरण
अपर समाहर्ता–आपदा प्रबंधन बृजकिशोर पांडे ने बताया कि:
सभी 17 प्रखंडों में वर्षा मापक यंत्र स्थापित और कार्यरत हैं।
सरकारी नावों की संख्या 05 है, जबकि निजी नावें (इकरारनामा सहित) 16 हैं।
उपलब्ध पॉलिथीन शीट्स: 23,274
अधियाचित पॉलिथीन शीट्स: 35,000
प्रशिक्षित गोताखोरों की संख्या: 101
बचाव एवं राहत दलों की संख्या: 146
चिन्हित शरण स्थल: 219
चालू नलकूप: 319
बाढ़ आश्रय स्थल: 10
सामुदायिक रसोई: 256
अन्य विभागों की समीक्षा बैठक में पीएचईडी, आईसीडीएस, पशुपालन, कृषि, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जल निस्सरण प्रमंडल, स्वास्थ्य विभाग की भी समीक्षा की गई एवं आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।



