
उजास’ और पुणे प्रशासन की साझेदारी पुणे के 745 से ज़्यादा स्कूलों में माहवारी के दौरान स्वास्थ्य की पहल शुरू करेगी
माहवारी के दौरान स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता और पर्यावरण अनुकूल उत्पाद वितरण के ज़रिए पहले साल में 13 ज़िलों में 73,591 किशोरवयीन लड़कियों को मिलेंगे लाभ
माहवारी के दौरान स्वास्थ्य को व्यापक शिक्षा फ्रेमवर्क में शामिल करके एनईपी लक्ष्यों को पूरा करने में योगदान दिया जाएगा
पुणे : आदित्य बिरला एजुकेशन ट्रस्ट की एक पहल ‘उजास’ ने आज पुणे सरकार के साथ दो साल के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की। यह रणनीतिक सहयोग पुणे के स्कूलों में माहवारी के दौरान स्वास्थ्य जागरूकता और पहुंच में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, साथ ही व्यापक छात्र कल्याण को भी बढ़ावा देगा। माहवारी के दौरान स्वास्थ्य को बढ़ावा देकर एनईपी में उल्लिखित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के व्यापक दृष्टिकोण में योगदान देना इस साझेदारी का उद्देश्य है।
अपने मिशन में अगला कदम बढ़ाते हुए, ‘उजास’ माहवारी के दौरान स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए पुणे सरकार के सहयोग से पहल शुरू कर रहा है। 13 ज़िलों के 745 स्कूलों में 73,591 से अधिक किशोर लड़कियों तक पहुंचना उनका लक्ष्य है। माहवारी के दौरान स्वास्थ्य शिक्षा को स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रमों में एकीकृत करके और सामुदायिक प्लेटफार्मों का लाभ उठाकर, यह पहल गलतफहमियों को दूर करने, जानकारी पहुंचाने, ‘उजास’ के पर्यावरण के अनुकूल “हरे” सैनिटरी पैड वितरित करके उनकी पहुंच को बढ़ाने और उन्हें अपनाने में सुधार के लिए यह पहल प्रयास करती है। इसमें भाग लेने वाली हर लड़की को शिक्षा और पहुंच दोनों को सुदृढ़ करने के लिए सैनिटरी पैड के चार पैकेट दिए जाएंगे। माहवारी के बारे में बातचीत को सामान्य बनाने के लिए लड़कों, शिक्षकों और समुदायों को सेंसिटाइजेशन मॉड्यूल में शामिल किया जाएगा।
पुणे सरकार के साथ समझौता इस क्षेत्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा ढांचे में माहवारी के दौरान स्वास्थ्य को एकीकृत करने में एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है। ‘उजास’ पहल स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs), शिक्षकों और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ सक्रिय रूप से सहयोग कर रही है ताकि स्ट्रक्चर्ड कार्यशालाओं, लड़कों और लड़कियों के लिए सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम और शिक्षकों के नेतृत्व वाली पहलों को लागू किया जा सके। इन प्रयासों का उद्देश्य छात्रों के व्यापक कल्याण के लिए नई शिक्षा नीति (NEP) की प्रतिबद्धता के साथ तालमेल बिठाते हुए व्यवहार में स्थायी परिवर्तन को बढ़ावा देना है।
2022 से, ‘उजास’ ने अकेले पुणे ज़िले में लक्षणीय प्रभाव डाला है, 1,254 जागरूकता सत्र आयोजित किए हैं और 49,298 लाभार्थियों को इसमें शामिल किया है, जिनमें 44,298 लड़कियां, 1,925 लड़के, 197 शिक्षक और 2,878 महिलाएं शामिल हैं। इस अवधि के दौरान, स्कूल और सामुदायिक जुड़ाव पहलों के माध्यम से 8 लाख से अधिक सैनिटरी पैड वितरित किए गए, जिनमें ‘उजास’ के पर्यावरण के अनुकूल 708 “ग्रीन” पैड शामिल हैं।
‘उजास’ की प्रमुख सुश्री पूनम पाटकर ने कहा, “माहवारी के दौरान स्वास्थ्य एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता है, जिस पर खुलकर बातचीत और लगातार कार्रवाई की जानी चाहिए। पिछले कुछ वर्षों में, पुणे में हमारे काम ने हमें स्कूलों और समुदायों के साथ गहराई से जुड़ने का मौका दिया है, स्ट्रक्चर्ड जागरूकता सत्रों और पैड वितरण के ज़रिए लगभग 50,000 व्यक्तियों तक पहुँच बनाई है। इस प्रभाव ने पुणे सरकार के साथ हमारी विस्तारित साझेदारी के लिए एक मज़बूत नींव रखी है। इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से, हम वंचित क्षेत्रों में अपनी पहुंच को गहरा करना और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, स्कूलों और किशोरों के साथ मिलकर पहुँच और दृष्टिकोण दोनों को बदलना चाहते हैं।”
पुणे में हाल ही में हुए कार्यक्रम मूल्यांकनों ने ‘उजास’ के हस्तक्षेप से पहले जो जानकारी का अभाव था उसे उजागर किया है। ‘उजास’ के हालिया डेटा से पता चलता है कि, केवल 57% छात्रों को ही सही ढंग से पता है कि माहवारी क्या है, 31.48% लड़कियों का मानना था कि माहवारी का खून अशुद्ध होता है, 19% से भी कम लोगों को पता था कि सैनिटरी सामग्री को कितनी बार बदलना है, और केवल 50% को ही माहवारी के दौरान खराब स्वच्छता के स्वास्थ्य जोखिमों का पता था। ‘उजास’ की भागीदारी के बाद, इन संख्याओं में बढ़िया सुधार हुआ, कुछ में 500% से अधिक की वृद्धि हुई, जो माहवारी के बारे में लंबे समय से चली आ रही गलतफ़हमियों को दूर करने में लगातार, स्थानीय शिक्षा के गहन प्रभाव को दर्शाती है।
2021 में स्थापित, ‘उजास’ माहवारी से जुड़ी समस्याओं को कम करने और युवा लड़कियों और महिलाओं को जानकारी, पहुंच और सम्मान के साथ सशक्त बनाने के मिशन पर है। यह


