पूणे

देश को मूल्य आधारित शिक्षा की आवश्यकता

देश को मूल्य आधारित शिक्षा की आवश्यकता

स्कूली शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर की रायः एमआईटी ने स्वर्ण पदक विजेता छात्रों को किया सम्मानित

पुणे :”वर्तमान में देश को मूल्य आधारित शिक्षा की बहुत आवश्यकता है. इसके लिए सरकार को डॉ. विश्वनाथ कराड द्वारा शुरू की गई पहल के बारे में पूरी जानकारी दी जानी चाहिए और मार्गदर्शन दिया जाना चाहिए. ताकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चरित्रवान आदर्श छात्र तैयार किए जा सकें. यह विचार स्कूली शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर ने रखे.

विश्व शांति केंद्र आलंदी, माइर्स एमआईटी, पुणे द्वारा स्कूली छात्रों के लिए आयोजित विश्वधर्मी प्रो.डॉ. विश्वनाथ कराड आध्यात्मिक विज्ञान आधारित वैश्विक शिक्षा छात्रवृत्ति २०२५ में स्वर्ण पदक जीतनेवाले सर्वश्रेष्ठ छात्रों को माइर्स एमआईटी के संत ज्ञानेश्वर सभागार में आयोजित समारोह में सम्मानित किया गया. इस समय वे बतौर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे.

इस अवसर पर बालभारती के विशेष अधिकारी डॉ. अजयकुमार लोळगे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. माईर्स एमआईटी शिक्षा संस्था के संस्थापक विश्वधर्मी प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने अध्यक्षता निभाई.

साथ ही एमएआईआर महासचिव और एमआईटी विश्वप्रयाग विश्वविद्यालय, सोलापुर की कार्यकारी निदेशक प्रो. स्वाति कराड चाटे, एमआईटी शिक्षण संस्था की संयुक्त प्रबंध न्यासी डॉ. सुचित्रा कराड नागरे और परीक्षा के मुख्य समन्वयक और नागपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एस.एन.पठाण उपस्थित थे.

डॉ. पंकज भोयर ने कहा, राज्य में १ लाख ८ हजार स्कूल है. इनमें से ६५ हजार सरकारी स्कूल हैं और छात्रों की संख्या बढाने पर जोर दिया जा रहा है. आदर्श स्कूल बनाकर बेहतरीन सुविधाएं प्रदान की गई है. छात्रों को स्थिति से उबरने का साहस रखना चाहिए. साथ ही उन्हें याद रखना चाहिए कि कुछ भी असंभव नहीं है.

डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, चरित्र निर्माण और जीवन को सही दिशा देने के लिए सार्वभौमिक मूल्यों और मूल्य आधारित शिक्षा को फैलाने का प्रयास है. विद्यार्थियों को शारीरिक रूप से स्वस्थ, बौद्धिक रूप से कुशाग्र, आध्यात्मिक रूप से उन्नत और नैतिक रूप से सुसंस्कारित और अनुशासित होना चाहिए. ऐसे युवा पूरी दुनिया में सफल व्यक्तित्व के रूप में जाने जाएंगे. नैतिक मूल्यों की शिक्षा देकर भारतीय संस्कृति, परंपरा और दर्शन को भावी पीढ़ी को समझाना होगा.

डॉ. अजयकुमार लोळगे ने कहा, श्रुति, स्मृति, कृति विद्यार्थी जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है. इनका दैनिक जीवन में उपयोग किया जाना चाहिए. मूल्य आधारित शिक्षा प्रणाली विकसित करना आवश्यक है. जब यह बात सामने आएगी तो बच्चे सुन नही रहे शब्द सुनाई नहीं देंगे.

प्रो.स्वाति कराड चाटे ने कहा, हमें छत्रपति शिवाजी महाराज और महात्मा ज्योतिबा फुले का उदाहरण लेकर मूल्यवर्धित शिक्षा का पाठ सीखना चाहिए. चूंकि शिक्षा एक बहुत ही प्रभावी हथियार है, इसलिए शिक्षकों द्वारा छात्रों को दिए गए मूल्यों के माध्यम से समाज आगे बढ़ता है. शिक्षा के आधार पर डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने विश्व शांति के लिए दुनिया का सबसे बडा गुंबद बनाया है. उन्होंने मानवता के तीर्थ स्थल रामेश्वर रुई गांव में समय की धारा भी बदल दी है.

डॉ.एस.एन.पठाण ने इस पहल के आयोजन के पीछे की भूमिका के बारे में बताया. उन्होंने प्रस्तावना में यह भी कहा कि बच्चों के मन में नैतिक मूल्यों को स्थापित करना आवश्यक है. इससे छात्रोंं का दृष्टिकोण बदलता है. अच्छा चरित्र ही जीवन की सच्ची संपत्ति है.

इस अवसर पर छात्र प्रतिनिधि के रूप में सोहम संग्राम गंभीरे ने अपने विचार व्यक्त किए.

कार्यक्रम का संचालन सुप्रिया होले तथा देवयानी पालवे ने आभार माना.

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