
जिला स्त्री रुग्णालय, अमरावती और पुणे के एच. व्ही. देसाई आय हॉस्पिटल इनके सांघिक प्रयास से ४५ दिन के शिशु की दृष्टि बचाने में सफलता
पुणे, : रेटिनोपॅथी ऑफ प्री-मॅच्युरिटी इस स्थिति से जूझ रहे और आँखों के सर्जरी की अत्यंत जरुरत होने वाले ४५ दिन के बच्ची की दृष्टि बचाने में डॉक्टरों को सफलता प्राप्त हुई है. जिला स्त्री रुग्णालय,अमरावती के प्रशासन एवं कर्मचारी और पुणे के एच.व्ही.देसाई आय हॉस्पिटल की तत्परता से और सांघिक प्रयास से यह मुमकिन हुआ.
अमरावती जिला स्त्री रुग्णालय के विशेष नवजात चिकित्सा विभाग में (एसएनसीयू – स्पेशल न्यूबॉर्न केयर युनिट) ४५ दिन से उपचार ले रहे और ९९० ग्रॅम वजन के शिशु की रेटिनोपॅथी ऑफ प्रिमॅच्युरिटी के लिए १२ जून को टेस्ट की गयी. यह टेस्ट पॉझिटिव्ह आने के कारण बच्चे के आखों की सर्जरी करने के लिए भागदौड़ शुरू हो गयी,क्यूकी यह सर्जरी २-३ दिन में हो जाना जरुरी होता है.रेटिनोपॅथी ऑफ प्री-मॅच्युरिटी (आरओपी) यह समयपूर्व जन्म लिए बच्चो को आखों की एक गंभीर स्थिती है. अगर उसका निदान जल्दी नहीं हुआ तो हमेशा के लिए अंधापन आ सकता है. यह स्थिति ३४ हफ्ते से पहले पैदा हुए और २००० ग्रॅम से कम वजन के नवजात शिशु में दिखाई देता है. इस पर अगर उपचार नहीं हुआ तो,आंखों का पर्दा (रेटिना) आसपास के ऊतक से दूर जाता है (रेटिनल डिटैचमेंट). इस कारण दृष्टि दोष निर्माण हो सकता है और अंधापन आ सकता है.
लेकिन वैद्यकीय स्थिती यही एक चुनौती नहीं थी. बच्चे के माता- पिता (टेमरू,ता. चिखलदरा,जिल्हा अमरावती) आदिवासी समुदाय से होने के कारण उनकी भाषा किसी को समझ नहीं रही थी. उनकी आर्थिक परिस्थिती भी नहीं थी और सरकारी योजनाओ में पात्र हो ऐसे दस्तावेज भी नहीं थे, लेकिन समय भी जरूरी था. स्थिति का गांभीर्य समझ कर अमरावती स्त्री जिला रुग्णालय के एसएनसीयू विभाग की प्रमुख डॉ. प्रीती इंगळे ने तत्काल एच.व्ही.देसाई आय हॉस्पिटल की वैद्यकीय संचालिका डॉ. सुचेता कुलकर्णी को संपर्क किया और मुफ्त उपचार करोगे क्या यह पूछा. डॉ.कुलकर्णी ने तुरंत सहमत होकर बच्चे को तुरंत पुणे भेजने को कहा. लेकिन माता-पिता की आर्थिक परिस्थिती बहुत ख़राब होने के कारन पुणे जाने के लिए तिकीट के भी पैसे नहीं थे. जिल्हा स्त्री रुग्णालय के कर्मचारियों ने बच्चे के पिता का समुपदेशन शुरू किया लेकिन वह पैसा न होने के कारण तैयार नहीं हो रहे थे. उनका गांव भी दूर है और गांव जाने के लिए भी पैसे नहीं, ऐसा उन्होंने कहा.
जिला प्रशासन के प्रकाश खडकेजी ने मेळघाट के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. तिलोत्तमा वानखेड़े और काटकुंब के प्राथमिक आरोग्य केंद्र डॉ. ऐश्वर्या वानखेडे को संपर्क किया. उन्होंने तुरंत पैसो की मदद करते हुए ५००० रूपये डिजिटल माध्यम से भेजें. 12 जून को रात 10.45 बजे वाली ट्रेन थी,लेकिन माता-पिता तैयार नहीं थे, इसलिए उनकी ट्रेन छूट गई. लेकिन इन सभी लोगों ने अपनी कोशिश शुरू रखी और १३ जून का टिकट निकाल कर बच्चे के पिता को जाने के लिए तैयार किया.इन लोगों ने खुद ही उन्हें ट्रेन में बिठाया. १४ जून को सुबह ७ बजे वह पुणे स्टेशन पहुंचे और वहां एच. व्ही. देसाई आय हॉस्पिटल के श्री. विष्णू सर ने रिक्षा की व्यवस्था की. इसके तुरंत बाद बच्चे की सर्जरी शुरू हुई और वह सफल रही. उसी दिन श्री. विष्णु ने शाम 6.30 बजे उन्हें वापस ट्रेन में बैठाया.टी.टी. से बात करने के बाद, उनके ठीक से बैठने की व्यवस्था की गई और बच्चे को आगे के इलाज के लिए अमरावती जिला अस्पताल में वापस भर्ती कराया गया.अब बच्चे की स्थिति अच्छी है .
इस बारे में बात करते हुए एच.व्ही.देसाई आय हॉस्पिटल की वैद्यकीय संचालिका डॉ. सुचेता कुलकर्णी ने कहा की,इस शिशु में रेटिनोपॅथी ऑफ प्रिमॅच्युरिटी की स्थिति अधिक आक्रमक थी. सामान्य रूप से आरओपी के मामलों में सर्जरी 3 से 4 दिनों के भीतर करनी होती है, लेकिन आक्रमक मामलों में इसे 1 से 2 दिनों के भीतर करने की आवश्यकता होती है, अन्यथा हमेशा के लिए अंधापन आ सकता है, यही कारण है कि अमरावती जिला महिला अस्पताल द्वारा की गई भागदौड़ बहुत महत्वपूर्ण है. एच.वी. देसाई आई हॉस्पिटल की आरओपी जांच की निशुल्क सेवा पुणे और सातारा के दो जिला अस्पतालों में शुरू है. दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों को अक्सर ऐसी आपातकालीन स्थितियों में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, यही वजह है कि हम उन तक पहुंचने और वहां ऐसी सेवाएं उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं



