
“अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संयुक्त संघर्ष का ऐलान” – माजी मंत्री आरिफ नसीम खान
मुंबई में आयोजित ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस फॉर माइनॉरिटी’ की गोलमेज बैठक में गंभीर मंथन, राज्यभर में अभियान चलाने की रणनीति तय
मुंबई, ब्यूरो विशाल समाचार
“राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय भय और अन्याय का शिकार हो रहा है। यह संघर्ष सिर्फ राजनीतिक नहीं रहेगा, बल्कि इसे सामाजिक और न्यायिक स्तर पर भी मजबूती से लड़ा जाएगा। सभी विचारधाराओं के लोगों को साथ लेकर हमें संविधान और न्याय की लड़ाई लड़नी होगी।” यह तीखा वक्तव्य महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मंत्री आरिफ नसीम खान ने मुंबई के इस्लाम जिमखाना, नरिमन पॉइंट में आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस फॉर माइनॉरिटी की गोलमेज बैठक में दिया।
यह बैठक राज्य में मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों की बढ़ती घटनाओं के संदर्भ में आयोजित की गई थी। इस अवसर पर पूर्व मंत्री नवाब मलिक, पूर्व विधायक वजाहत मिर्ज़ा, पूर्व विधायक यूसुफ अब्राहानी, IUML प्रदेशाध्यक्ष अब्दुर रहमान, पूर्व नगरसेवक रशीद शेख, अधिवक्ता अय्यूब शेख, मेधा कुलकर्णी, शहाबुद्दीन शेख, सलीम बागवान, सलीम पटेकारी और आयोजक व कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष राहुल डंबाले सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आए सामाजिक कार्यकर्ता व अल्पसंख्यक प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
बैठक की अध्यक्षता सेवानिवृत्त वरिष्ठ IPS अधिकारी अब्दुर रहमान ने की। इस बैठक के माध्यम से राज्यभर में अल्पसंख्यकों के समक्ष उत्पन्न हो रहे सामाजिक, धार्मिक और प्रशासनिक अन्यायों पर विस्तार से चर्चा की गई और आगामी रणनीति पर निर्णय लिया गया।
घटनाएं जो चिंता बढ़ा रही हैं:
नांदेड़, औरंगाबाद, नागपुर, पुणे, कोल्हापुर और अहिल्यानगर जैसे जिलों से आए प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों की मिसालें रखीं। कहीं ‘लव जिहाद’ के नाम पर युवकों पर हिंसक हमले हुए, तो कहीं मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर एकतरफा प्रशासनिक कार्रवाई की गई। मॉब लिंचिंग की घटनाओं ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि इन घटनाओं ने अल्पसंख्यक समाज में भय का माहौल बना दिया है।
पूर्व मंत्री नवाब मलिक ने कहा, “अगर प्रशासन न्याय नहीं देता, तो हमें संविधान के तहत न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए। संविधान हमें न्याय का भरोसा देता है।”
पुलिस की निष्क्रियता और राजनीतिक संरक्षण पर सवाल
अध्यक्षीय भाषण में पूर्व IPS अधिकारी अब्दुर रहमान ने कहा कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही घटनाओं को प्रशासन का मौन समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा, “राज्य में एक मंत्री मुस्लिम समाज के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का उपयोग कर रहा है। उस पर 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन न तो उस पर कार्रवाई होती है, न चार्जशीट दाखिल होती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”
उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस के पास इतनी शक्ति है कि वह “सुओ मोटू” (Suo Moto) अपराध दर्ज कर सकती है, लेकिन जब मामला अल्पसंख्यकों का होता है, तो वे चुप रहते हैं। हमें एकजुट होकर न्यायिक लड़ाई छेड़नी होगी।
पूर्व विधायक वजाहत मिर्ज़ा ने सुझाव दिया कि ऐसा ही कार्यक्रम नागपुर में भी आयोजित किया जाए। यूसुफ अब्राहानी ने आंदोलन को अपना समर्थन घोषित करते हुए राज्यव्यापी आयोजन की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
निर्णायक संकल्प
बैठक में सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष किसी राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह अल्पसंख्यकों के अधिकारों और भारत के संविधान की रक्षा के लिए होगा। निर्णय लिया गया कि राज्य के हर जिले में इसी तरह की गोलमेज बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिससे स्थानीय समस्याएं समझी जा सकें और संयुक्त क्रियाशीलता समिति (Joint Action Committee) का गठन किया जा सके।
सभी धर्मनिरपेक्ष विचारधारा वाले संगठनों व व्यक्तियों को इस मुहिम में शामिल होने का आह्वान किया गया।
आयोजन टीम की सराहना
कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रदेश संयोजक जावेद शेख, सचिव मुज्जम्मिल शेख, सिकंदर मुलानी और शहाबुद्दीन शेख की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों ने आयोजन की सराहना की।
यह गोलमेज बैठक न केवल अल्पसंख्यकों के मुद्दों को लेकर संवेदनशीलता को उजागर करती है, बल्कि सामाजिक समरसता और न्याय के लिए एकजुट संघर्ष की आवश्यकता को भी बल देती है।

