
शीर्षक: ‘जनक शोधांचे’ पुस्तक हर विद्यालय और महाविद्यालय तक पहुँचना चाहिए – अतिरिक्त सचिव वेणुगोपाल रेड्डी
पुणे, ब्यूरो डीएस तोमर
डॉ. जयंत खंदारे द्वारा रचित ‘जनक शोधांचे’ पुस्तक अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे अधिक से अधिक स्कूलों और कॉलेजों तक पहुँचाया जाना चाहिए, ऐसा मत उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग, महाराष्ट्र शासन के अतिरिक्त सचिव श्री वेणुगोपाल रेड्डी ने व्यक्त किया।
वे सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के संत नामदेव सभागार में आयोजित ‘जनक शोधांचे’ पुस्तक के प्रकाशन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता एमआईटी विश्वशांति विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. विश्वनाथ कराड ने की। समारोह में प्रमुख अतिथियों के रूप में डॉ. हर्षदीप कांबळे (प्रधान सचिव, सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता मंत्रालय), डॉ. हिरवानी, डॉ. सुरेश गोसावी (कुलपति, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय), गणेश शिंदे, विश्वविद्यालय के रक्षा अध्ययन विभाग के प्रमुख डॉ. विजय खरे एवं शशिकांत कांबळे (स्वान रिसर्च एंड सोशल स्टडी फाउंडेशन) उपस्थित थे।
डॉ. हर्षदीप कांबळे ने कहा कि हमारे देश में उद्योग और शिक्षा के बीच समन्वय की कमी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि केवल जीडीपी की वृद्धि पर्याप्त नहीं है, बल्कि अनुसंधान भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि उसी के माध्यम से देश आत्मनिर्भर बन सकता है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक शोध और शिक्षा के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगी।
लेखक डॉ. जयंत खंदारे ने बताया कि यह उनका तीसरा वैज्ञानिक पुस्तक है, जिसमें विज्ञान के इतिहास में घटित दिव्य क्षणों के साथ-साथ बीते दो दशकों में वैश्विक स्तर पर योगदान देने वाले 60 महान वैज्ञानिकों के जीवन और कार्य का अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा को प्रोत्साहित करना है।
गणेश शिंदे ने कहा कि भारत में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की कमी है और जब तक हम शिक्षा को केवल रोजगार का साधन मानते रहेंगे, तब तक वैज्ञानिक सोच विकसित नहीं हो पाएगी।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. कराड ने विज्ञान और आध्यात्मिकता के संतुलन पर बल दिया और कहा कि इन दोनों का समन्वय आवश्यक है।
शशिकांत कांबळे ने प्रस्ताविक भाषण में कहा कि यह पुस्तक छात्रों को विज्ञान के महत्व को समझने में मदद करेगी और उन्हें दुनिया को अधिक सशक्त दृष्टिकोण से देखने का नजरिया देगी।
कार्यक्रम का संचालन ऋतुजा फुलकर ने किया और आभार प्रदर्शन गौरीशंकर आनंद ने किया।


