पूणे

“सफल उद्यमी बनने के लिए जोखिम उठाना सीखें” – गुरु प्रसाद बिस्वाल

“सफल उद्यमी बनने के लिए जोखिम उठाना सीखें” – गुरु प्रसाद बिस्वाल

एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी में ‘राइड-2025’ का उद्घाटन
70 से अधिक स्टार्टअप, 5,000 से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति

पुणे:  “जीवन में सफल उद्यमी बनने के लिए विद्यार्थियों को जोखिम उठाना सीखना चाहिए। किसी भी प्रकार का ‘कम्फर्ट ज़ोन’ खतरनाक होता है, इसलिए उसमें नहीं रुकना चाहिए। भविष्य उद्यमियों के लिए अनुकूल है, अतः अच्छे समय की प्रतीक्षा करने के बजाय अपने विचारों के साथ प्रयास कर भविष्य का निर्माण करें।” यह प्रेरणादायी विचार भारत फोर्ज के एयरोस्पेस बिज़नेस वर्टिकल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) गुरु प्रसाद बिस्वाल ने व्यक्त किए।

वे एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी द्वारा विद्यार्थियों के लिए आयोजित पाँच दिवसीय रिसर्च, इनोवेशन, डिज़ाइन एंड आंत्रप्रेन्योरशिप (RIDE-2025) के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के कुलगुरु डॉ. आर.एम. चिटणीस, सीएओ डॉ. प्रसाद खांडेकर, स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रा. (डॉ.) नीरज महिंद्रू, हितेश जोशी, निनाद पाटिल, डॉ. सिद्धार्थ चक्रवर्ती, डॉ. सुमन देवादुला और डॉ. उर्वशी मक्कर उपस्थित थे। कार्यक्रम में 5,000 से अधिक विद्यार्थी शामिल हुए।

कार्यक्रम का आयोजन विश्वधर्मी प्रा. (डॉ.) विश्वनाथ दा. कराड के मार्गदर्शन और कार्याध्यक्ष राहुल विश्वनाथ कराड के नेतृत्व में किया गया।

गुरु प्रसाद बिस्वाल ने आगे कहा—
“जीवन में जोखिम लिए बिना कार्य करना आपके करियर में सबसे बड़ा जोखिम है। असफलता केवल एक प्रतिक्रिया है, जिससे हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। किसी भी करियर के मूल सिद्धांत को समझ लेने के बाद समाधान स्वतः प्राप्त होते हैं। प्रौद्योगिकी के इस युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से प्रतिस्पर्धा नहीं की जा सकती, बल्कि उसके साथ सहयोग कर ही आगे बढ़ना होगा। यदि सफल उद्यमी बनना है, तो पहले उसी दिशा में सतत विचार करना सीखना आवश्यक है।”

इस अवसर पर डॉ. प्रसाद खांडेकर ने कहा—
“‘राइड’ की संकल्पना ही युवाओं को शोध, नवाचार, डिज़ाइन और उद्यमिता के चरणों में सशक्त बनाना है। भारत की विकास दर को देखते हुए देश की अर्थव्यवस्था शीघ्र ही तीन ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने के मार्ग पर है। इसके लिए नवाचार पर केंद्रित रहना आवश्यक है। वर्तमान में भारत की शैक्षणिक व्यवस्था नवाचार को समर्थन देने के लिए पर्याप्त परिपक्व है।”

डॉ. आर.एम. चिटणीस ने कहा—
“शिक्षा के माध्यम से समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाले सतत, समावेशी और प्रगतिशील परिवर्तन को बढ़ावा देना तथा विद्यार्थियों के भविष्य को सशक्त बनाना ‘राइड’ का मुख्य उद्देश्य है। शिक्षा के बाद केवल नौकरी की दिशा में न बढ़कर, सोच-समझकर उद्योग या व्यवसाय में कदम रखने के लिए यह एक उपयुक्त मंच है।”

इस अवसर पर प्रा. (डॉ.) नीरज महिंद्रू ने स्वागत भाषण दिया और ‘राइड’ के बारे में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन प्रा. (डॉ.) गौतम बापट ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. सिद्धार्थ चक्रवर्ती ने किया।

 

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