“बिना जांच के ‘नकली’ का ठप्पा — क्या यही है लोकल मीडिया की जिम्मेदारी?”
विशाल समाचार, मैनपुरी
मैनपुरी — शुक्रवार को मुंबई स्थित ईआईपीआर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की टीम, फील्ड अधिकारी अजय कुमार के नेतृत्व में कोतवाली पुलिस के साथ नगर की तीन ऑटो पार्ट्स की दुकानों — बालाजी ऑटो पार्ट्स (आवास विकास कालोनी), चौधरी ऑटो पार्ट्स (कचहरी रोड) और हिंदुस्तान ऑटो पार्ट्स,भारत आटो पार्ट्स— पर पहुंची।
टीम का दावा है कि महिंद्रा कंपनी के नाम से लोगो और स्टीकर लगे कथित तौर पर नकली ऑटो पार्ट्स बरामद हुए, जिनमें 20 ऑयल फिल्टर, 22 किट फिल्टर, 5 फोम फिल्टर, 3 स्लोन, 1 बैरिंग क्लच सहित अन्य पार्ट्स हैं। बरामद माल को कोतवाली लाकर कंपनी की तहरीर पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की।
लेकिन असली सवाल यहां से शुरू होता है।
पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी खुद वीडियो में कहते दिख रहे हैं — “बिना जांच के हम किसी भी माल को नकली नहीं कह सकते।”
जब जांच रिपोर्ट तक का इंतजार जरूरी है, तो फिर कुछ स्थानीय मीडिया ने छापेमारी के समय ही “नकली पार्ट्स” लिखने की इतनी जल्दी क्यों दिखाई?
क्या यह पत्रकारिता है या फिर सनसनी बटोरने की होड़?
व्यापारी वर्ग का पक्ष — व्यापारियों का कहना है कि बिना प्रमाण के लगाए गए ऐसे आरोप सीधे उनकी साख पर चोट करते हैं। ग्राहकों में गलत संदेश जाता है और वर्षों की मेहनत से बनी प्रतिष्ठा पल भर में धूमिल हो सकती है। पत्रकारिता का पहला सिद्धांत है — “तथ्य पहले, राय बाद में।”
विशाल समाचार की स्पष्ट स्थिति — हम प्रमाण के बिना किसी को दोषी ठहराने में विश्वास नहीं रखते। प्रशासन अपनी जांच पूरी करे, उसके बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही होगा। मीडिया का दायित्व है कि वह जनता के सामने सिर्फ सच्चाई रखे, न कि अनुमान।



