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स्कूल चलो अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ जिलाधिकारी ने बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चे को वितरित की स्कूल ड्रेस, जूता-मोजा और स्टेशनरी।

स्कूल चलो अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ जिलाधिकारी ने बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चे को वितरित की स्कूल ड्रेस, जूता-मोजा और स्टेशनरी।

 

बाल श्रम की बेड़ियों से निकलकर शिक्षा की ओर बढ़े कदम’

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान:औरैया उत्तर प्रदेश 

औरैया / प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल ‘स्कूल चलो अभियान’ के द्वितीय चरण के प्रथम दिवस में जिलाधिकारी बृजेश कुमार, द्वारा स्वयं एक ऐसे बच्चे को स्कूल किट (जूता-मोजा, स्कूल ड्रेस, बैग और स्टेशनरी) वितरित की गई, जिसे कुछ ही दिनों पूर्व बाल श्रम के चंगुल से मुक्त कराया गया था।

प्रशासन की सतर्कता और शिक्षा विभाग के त्वरित प्रयासों के चलते इस बच्चे का नामांकन कुछ दिवस पूर्व प्राथमिक विद्यालय गपकापुर,विकासखण्ड- भाग्यनगर में सुनिश्चित कराया गया था। नवीन सत्र और अभियान के दूसरे चरण के पहले ही दिन बच्चे को पूरे आत्मसम्मान के साथ मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ दिया गया।

इस अवसर पर बच्चे और उसके अभिभावकों का हौसला बढ़ाते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है। बाल श्रम एक सामाजिक अभिशाप है, जिसे सामूहिक प्रयासों से ही खत्म किया जा सकता है। इस बच्चे के चेहरे की मुस्कान यह बयां कर रही है कि जब सही समय पर सही मदद मिले, तो हर बच्चा देश का भविष्य सवारने का दम रखता है। प्रशासन का संकल्प है कि जनपद का कोई भी बच्चा ईंट-भट्टों, होटलों या दुकानों पर काम करने के बजाय स्कूल की बेंच पर बैठे।

जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और श्रम विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि जनपद के सभी क्षेत्रों में सघन चेकिंग अभियान चलाया जाए। यदि कोई भी ढाबा, होटल या प्रतिष्ठान बाल श्रम कराता पाया गया, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

स्कूल चलो अभियान के द्वितीय चरण को पूरी तरह सफल बनाने के लिए जिलाधिकारी ने निम्नलिखित कार्ययोजना पर जोर दिया- ड्रॉप-आउट (पढ़ाई छोड़ चुके) और कभी स्कूल न जाने वाले बच्चों को चिन्हित कर तत्काल नामांकन कराया जाए।

ऐसे परिवार जो आर्थिक तंगी या अज्ञानता के कारण बच्चों से काम कराते हैं, उन्हें सरकार की लोक-कल्याणकारी योजनाओं और मुफ्त शिक्षा के लाभों के बारे में समझाया जाए।

सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि सीधे अभिभावकों के खातों में पहुंचे, ताकि बच्चों को यूनिफॉर्म, स्टेशनरी आदि की कमी का सामना न करना पड़े।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी राम कृपाल चौधरी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजीव कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी राजेश कुमार आदि उपस्थित रहे।

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