संपादकीय

साइबर अपराध पर सख़्ती ज़रूरी – पुराने वीडियो वायरल कर बदनाम करने वालों पर लगे रोक

साइबर अपराध पर सख़्ती ज़रूरी पुराने वीडियो वायरल कर बदनाम करने वालों पर लगे रोक

विशेष संपादकीय टीम विशाल समाचार

सोशल मीडिया आज सूचना का सबसे तेज़ हथियार बन चुका है। लेकिन अफ़सोस यह है कि कुछ लोग सत्ता की राजनीति के लिए इसे हथियार बनाकर देश और प्रदेश की छवि को धूमिल करने में लगे हैं। एक-दो साल नहीं बल्कि तीन-चार साल पुराने वीडियो उठाकर पलक झपकते ही वायरल कर दिए जाते हैं। मिनटों में देश-विदेश तक बदनामी फैल जाती है।

 

सवाल यह है कि क्या यह क़ानूनन अपराध नहीं है? जब फर्जी कंटेंट या भ्रामक वीडियो पोस्ट करना साइबर अपराध की श्रेणी में आता है, तो फिर पुराने वीडियो पब्लिश कर जनता को भ्रमित करना भी अपराध की श्रेणी में क्यों न माना जाए? यह स्थिति हमारी जांच एजेंसियों और सरकार दोनों के लिए गंभीर चेतावनी है।

 

विडंबना यह है कि जब यही काम कोई मीडिया संस्था गलती से कर देती है, तो वही पार्टियों के लोग मीडिया को कटघरे में खड़ा कर कोर्ट-कचहरी तक पहुंच जाते हैं। मगर जब राजनीतिक फायदे के लिए खुद ऐसे वीडियो वायरल किए जाते हैं तो वही नेता चुप्पी साध लेते हैं। यह दोहरी मानसिकता देश और लोकतंत्र दोनों को शर्मसार करती है।

 

सत्ता पाने की होड़ में ऐसे लोग बहसों में इस तरह की टिप्पणियाँ करते हैं मानो बहुत बड़ा तीर मार लिया हो। लेकिन वास्तविकता यह है कि स्टूडियो की डिबेट्स में शोर मचाकर जनता की समस्या का हल नहीं निकलता। नेताओं को चाहिए कि वे ज़मीन पर जाकर लोगों से मिलें, उनकी तकलीफ़ें सुनें। और सबसे अहम—बहस और टिप्पणी के दौरान इतना तो ख्याल रखें कि सामने वाला भी किसी की बहन-बेटी है।

 

(आईटी एक्ट, 2000 …धारा 66D–धोखाधड़ी या भ्रामक सामग्री प्रसारित करना अपराध।

धारा 67–समाज में भ्रम और अशांति फैलाने वाला कंटेंट दंडनीय।

धारा 66F–देश की संप्रभुता व सुरक्षा के लिए खतरा बनाना साइबर टेररिज़्म।

•भारतीय दंड संहिता (IPC)धारा 505–अफवाह फैलाकर समाज में भ्रम या

वैमनस्य उत्पन्न करना अपराध।)

अब केंद्र सरकार और गृहमंत्रालय केंद्रीय एजेंसियां,केंद्रीय साइबर शाखा से यह उम्मीद करते हैं कि किसी भी पार्टी या संगठन का व्यक्ति अगर पुराने भ्रमक वीडियो वायरल करता है तो उस पर तुरंत और सख़्त कार्रवाई की जाए। सत्ता की राजनीति की खातिर देश और प्रदेश की छवि को दागदार करने वालों पर रोक लगाना आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है।

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