
इटावा वन विभाग घोटाला : कबूलनामा दबा, शिकायतकर्ता पर धमकी – मंत्री, सीएम और बड़े अफसर सब चुप क्यों?
शिवराज सिंह राजपूत, इटावा
इटावा/यूपी : उत्तर प्रदेश का वन विभाग इन दिनों सबसे बड़े सवालों के घेरे में है। इटावा जिले में उजागर हुआ यह घोटाला बताता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं और किस स्तर तक इसका संरक्षण है।
जसवंतनगर क्षेत्र के फॉरेस्ट गार्ड द्वारा 30 लाख रू.में 7 लाख रुपये की अवैध वसूली का कबूलनामा विभागीय जांच में दर्ज हुआ,(जहां पर 30 लाख का खेला हुआ है?)लेकिन कार्रवाई करने के बजाय पूरा मामला “साक्ष्य” के बहाने दबा दिया गया। और तो और – सच्चाई उजागर करने वाले शिकायतकर्ता को ही धमकियां दी जा रही हैं।
भ्रष्टाचार में फंसे अफसर को “पूरा साम्राज्य”
सबसे हैरत की बात यह है कि भ्रष्टाचार में फंसे क्षेत्राधिकारी अमित कुमार सिंह को विभाग ने एक नहीं बल्कि कई चार्ज सौंप दिए।
सैफई क्षेत्र,जसवंतनगर,बसरेहर ब्लॉक
पहले तो भरथना का चार्ज भी इन्हीं के पास था।
यानी जिस अफसर के खिलाफ विभागीय रिकॉर्ड में ही गड़बड़ी मान ली गई, वही आज इटावा की आधी से ज्यादा रेंज का मालिक बना बैठा है।
डीएफओ, एसडीओ और कानपुर मुख्यालय पर भी सवाल?
अब सवाल सिर्फ क्षेत्राधिकारी तक सीमित नहीं रह गया।
कानपुर के विभागीय अधिकारी क्या कर रहे हैं
क्या डीएफओ को यह सब दिखाई नहीं दे रहा?
एसडीओ और वन विभाग के बड़े अफसर चुप क्यों हैं?
आखिरकार इतना बड़ा कबूलनामा सामने आने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? इसका मतलब साफ है कि ऊपर तक कहीं न कहीं बहुत बड़ा संरक्षण मिल रहा है।
जनता के तीखे सवाल
कबूलनामे के बाद भी कार्रवाई क्यों ठप है?
शिकायतकर्ता को धमकाना किस कानून और लोकतंत्र की किताब में लिखा है?
क्या मंत्री और मुख्यमंत्री आंख मूँदकर भ्रष्टाचारियों की ढाल बने हैं?
आखिर इस पूरे खेल का सरगना कौन है, जो दोषियों को बचा रहा है?



