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पुण्यातील वाहतूक कोंडीवर योग्य उपाययोजनांची गरज – डॉ. हुलगेश चलवादी

पुण्यातील वाहतूक कोंडीवर योग्य उपाययोजनांची गरज – डॉ. हुलगेश चलवादी

सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सक्षम करें; बसपा का आवाहन

रिपोर्ट: पुणे विशाल समाचार 

पुणे में दिन-प्रतिदिन बढ़ती हुई यातायात समस्या और उससे उत्पन्न जाम की स्थिति पुणेकरों के लिए गंभीर समस्या बन गई है। टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स – 2024 की रिपोर्ट के अनुसार पुणे में 10 किलोमीटर का सफर तय करने में औसतन 33 मिनट 22 सेकंड लगते हैं। विश्व के 500 शहरों की सूची में पुणे चौथे स्थान पर है। यहां की यातायात गति अधिकांश शहरों से कहीं कम है। एक सामान्य पुणेकर वर्षभर में लगभग 108 घंटे केवल ट्रैफिक जाम में गंवाता है, यह अध्ययन में सामने आया है। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। बढ़ते जाम के प्रभाव को कम करने के लिए प्रशासन को दीर्घकालिक उपाय करने की आवश्यकता है, ऐसा मत बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव एवं पश्चिम महाराष्ट्र ज़ोन के मुख्य प्रभारी डॉ. हुलगेश चलवादी ने बुधवार (20 अगस्त) को व्यक्त किया।

 

डॉ. चलवादी ने कहा कि यातायात जाम से केवल असुविधा ही नहीं होती, बल्कि इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था, नागरिकों के स्वास्थ्य और मानसिक तनाव पर भी पड़ता है। मुख्य मार्गों पर सुचारु ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था, अवैध पार्किंग पर नियंत्रण तथा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भारी वाहनों पर प्रतिबंध जैसी तात्कालिक उपाय योजनाएँ तुरंत लागू की जानी चाहिए।

 

उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सक्षम किए बिना यातायात जाम पर काबू नहीं पाया जा सकता। पीएमपीएमएल बसों की संख्या बढ़ाकर यातायात का बोझ कम किया जा सकता है। मेट्रो और बसों के लिए लास्ट माइल कनेक्टिविटी मजबूत करना, कारपूलिंग और कंपनी शटल सेवाओं को बढ़ावा देना आवश्यक है। साथ ही साइकिल ट्रैक एवं पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित मार्ग भी बनाए जाने चाहिए।

 

यातायात समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए फ्लाईओवर, अंडरपास, मल्टी-लेवल पार्किंग हब्स, रिंग रोड और मेट्रो विस्तार परियोजनाओं को समय पर पूरा करना आवश्यक है। राज्य सरकार का वर्ष 2026 तक पुणे की औसत वाहन गति 30 किलोमीटर प्रति घंटा करने का लक्ष्य स्वागत योग्य है, किंतु 1.3 लाख करोड़ रुपये की मोबिलिटी योजना में पारदर्शिता और कठोर अनुपालन जरूरी है।

 

डॉ. चलवादी ने आगे कहा कि यातायात नियमों का पालन, लेन अनुशासन, ‘नो हॉर्निंग’ अभियान, तथा विद्यालय और कार्यालयों में फ्लेक्सिबल टाइमिंग्स लागू करने से भी जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

 

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