इटावा

जनसुनवाई में खानापूरी – कॉपी-पेस्ट रिपोर्ट ने खोली भ्रष्टाचार की परतें

जनसुनवाई में खानापूरी कॉपी-पेस्ट रिपोर्ट ने खोली भ्रष्टाचार की परतें

 

इटावा/कानपुर विशाल समाचार मुख्य संवाददाता 

योगी सरकार भ्रष्टाचार पर नकेल कसने और सुशासन की दुहाई देती रही है। लेकिन हकीकत जमीनी स्तर पर बिल्कुल उलट नज़र आ रही है। इटावा और कानपुर मंडल में घटित हालिया मामला न केवल विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि सीधे-सीधे सरकार की “जनसुनवाई पोर्टल” जैसी महत्वपूर्ण पहल की साख पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।

शिकायतकर्ता शिवाय राजपूत ने शिकायत संख्या 12000250136728 दर्ज कराई थी। आदेश हुआ कि जांच हो। पर जो हुआ, उसने पूरे सिस्टम की कलई खोल दी। प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी प्रभाग, इटावा ने 31 जुलाई 2025 को एक रिपोर्ट लगाई, और महज़ 8 अगस्त 2025 को मुख्य वन संरक्षक, कानपुर मंडल ने वही रिपोर्ट हूबहू कॉपी-पेस्ट कर दी।

न कोई मौके की जांच, न कोई साक्ष्य, न गवाहों के बयान—सिर्फ़ औपचारिकता। फोन पर कुछ बातें कर लीं, काग़ज़ पर खानापूरी कर दी और भ्रष्टाचारियों को बचाने का रास्ता साफ़ कर दिया।

भ्रष्टाचारियों को बचाने की कवायद

इस पूरे खेल में डीएफओ, क्षेत्राधिकारी, डिप्टी रेंजर और वन रक्षक तक को बचाने की कवायद साफ़ झलकती है। शिकायतकर्ता का कहना है—यह सब एक सुनियोजित योजना के तहत किया गया। भ्रष्टाचार की गंध इतनी तीखी है कि विभाग ने ईमानदारी से जाँच करने की बजाय आरोपी अधिकारियों को क्लीनचिट देने में ही भलाई समझी।

जनता का सवाल

जनता पूछ रही है—क्या यही “भ्रष्टाचार पर नकेल कसने” का दावा है? क्या यही सुशासन की परिभाषा है कि जनसुनवाई जैसी व्यवस्था को मज़ाक बना दिया जाए? क्या जनता की शिकायत का समाधान सिर्फ़ कॉपी-पेस्ट रिपोर्ट से होगा?

सरकार की साख पर आंच

यह मामला योगी सरकार के लिए गंभीर चुनौती है। क्योंकि अगर विभागों में यही रवैया रहा, तो जनता का विश्वास पूरी तरह से टूट जाएगा। जनसुनवाई पोर्टल, जो कभी पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रतीक माना गया था, अब महज़ खानापूरी और भ्रष्ट अधिकारियों की ढाल बनता जा रहा है।

जनता की मांगजनता की एक ही मांग है—

इस मामले पर तुरंत उच्च स्तरीय जांच हो।

कॉपी-पेस्ट रिपोर्ट बनाने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

भ्रष्ट अधिकारियों—डीएफओ, क्षेत्राधिकारी, डिप्टी रेंजर और वन रक्षक—की भूमिका उजागर कर उन्हें जवाबदेह बनाया जाए।

जनसुनवाई पोर्टल की प्रक्रियाओं को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए।

अगर सरकार ने इस पर सख़्त कदम नहीं उठाए तो “भ्रष्टाचार मुक्त शासन” का नारा जनता के बीच खोखला साबित होगा। आज जनता यही कह रही है कि—“जनसुनवाई में न्याय नहीं, सिर्फ़ खानापूरी हो रही है।”

कार्यालय प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग,इटा द्वारा लगाई गई रिपोर्ट 

क्या कमाल है वन विभाग इटावा के अधिकारीयों का और तो कानपुर मंडल ने हद ही कर दी तीनों भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए मक्खन मलाई मारकर रिपोर्ट लगा दी ?मगर जनता पूंछ रही है कि तीनों भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही कब और जेल में डालोगे या इन्हें घर बिठाओगे,ऐसे अधिकारी सरकार की छवि को धूमिल कर रहे हैं.

 

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