पुणे में पहली जेटस्ट्रीम एथेरेक्टॉमी के माध्यम से 61 वर्षीय मधुमेही महिला का पैर काटने से बचाने में डॉक्टरों को मिली सफलता
पुणे : पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक में 29 जुलाई, 2025 को भर्ती हुए 61 वर्षीय मधुमेही महिला को 9 अगस्त, 2025 को डॉक्टरों द्वारा किए जेटस्ट्रीम एथेरेक्टोमी प्रक्रिया के बाद उसके पैर के एक हिस्से को काटने से बचा लिया गया है. यह शहर में पहली जेटस्ट्रीम एथेरेक्टोमी प्रक्रिया है. पैर में ठीक न होने वाले पैर के अल्सर (डायबिटिक फुट अल्सर) और कैल्शियम से कठोर पृष्ठभाग पर सुपरफिशियल फेमोरल आर्टरी (एसएफए) के कारण खतरा निर्माण हुआ था. न्यूनतम चीरों के साथ 45 मिनट की प्रक्रिया से उनके पैर में रक्तस्राव को सफलतापूर्वक रोका गया.
अस्पताल में भर्ती होने पर, मरीज़ एक दर्दनाक अल्सर से पीड़ित था जो ठीक नहीं हो रहा था. जाँच से पता चला कि पैर की पृष्ठभाग पर मुख्य धमनी (एसएफए) एक सख्त, पत्थर जैसे कैल्शियम जमाव से पूरी तरह अवरुद्ध हो गई थी. सावधानीपूर्वक मूल्यांकन के बाद, अस्पताल की चिकित्सा टीम ने जेटस्ट्रीम एथेरेक्टोमी प्रक्रिया को चुना. जेटस्ट्रीम एथेरेक्टोमी एक ऐसा उपकरण है जो कैल्शियम के कारण उत्पन्न रुकावट को तोड़ सकता है. यह प्रक्रिया 9 अगस्त को रूबी हॉल क्लिनिक के बाय -प्लेन कैथलैब में की गई. इसके तुरंत बाद, मरीज को तत्काल राहत महसूस हुई, उसके पैर का दर्द कम हो गया और रक्त प्रवाह पुनः शुरू हो गया. इससे अल्सर ठीक होने लगा और पैर काटने (ॲम्प्युटेशन) की नौबत नहीं आई. 14 अगस्त, 2025 को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज दिया गया.
पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक के चीफ इंटरव्हेंशनल रेडिओलॉजिस्ट डॉ.यादव मुंडे ने कहा की, यह किसी अन्य सामान्य रुकावट की तरह नहीं था, कैल्शियम के कारण रक्त वाहिका बहुत सख्त हो गई थी. ऐसे मामलों में, केवल बलून या स्टेंट से धमनी को खोलना मुश्किल हो जाता है, जिनका आमतौर पर उपयोग किया जाता है. जेटस्ट्रीम एथेरेक्टोमी उपकरण की सहायता से, हम इन कठोर जमावों को सुरक्षित रूप से तोड़ने, उसके पैर में रक्ताभिसरण बहाल करने और उसके पैर को बचाने में सक्षम हुए.
रूबी हॉल क्लिनिक के चीफ कार्डिओलॉजिस्ट,अध्यक्ष व व्यवस्थापकीय विश्वस्त डॉ.परवेझ ग्रांट ने कहा की, मधुमेह रोगियों में परिधीय धमनी रोग (पेरिफेरल आर्टरी डिसीज) एक बहुत ही आम समस्या है, लेकिन इसे अक्सर तब तक नजरअंदाज कर दिया जाता है जब तक कि अल्सर या गैंग्रीन जैसी जटिलताएं न उत्पन्न हो जाएं. यह तकनीक पुणे के लिए एक बड़ी सफलता है. इससे पहले से चुनौतीपूर्ण समस्याओं का इलाज करना और ॲम्प्युटेशन से बचना संभव हो जाता है, जिससे मरीज के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिलती है.
पेरिफेरल आर्टरी डिसीज (पीएडी) इस स्थिति में पैरों को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियां कठोर जमाव के कारण संकुचित हो जाती हैं. ये रुकावटें अक्सर मधुमेह के कारण अतिरिक्त कैल्शियम के कारण जटिल हो जाती हैं.यदि उपचार न किया जाए तो गैंग्रीन हो सकता है या पैर को बचाना मुश्किल हो सकता है. जेटस्ट्रीम एथेरेक्टोमी के माध्यम से मिली इस सफलता ने ऐसी चुनौतियों का सामना कर रहे मधुमेह मरीजों के लिए नई आशा जगाई है.



