पूणे

भविष्य में बुनियादी ढाँचे और विकास के लिए नवाचार, नीति और ज्ञान एकत्रीकरण आवश्यक

भविष्य में बुनियादी ढाँचे और विकास के लिए नवाचार, नीति और ज्ञान एकत्रीकरण आवश्यक

डॉ. प्रसाद की रायः निकमार यूनिवर्सिटी में ९वें अंतर्राष्ट्रीय,(ICCRIP 2025), सम्मेलन का समपान

 

पुणे,:  भविष्य के लिए सुदृढ बुनियादी ढाँचे के निर्माण हेतु नीतिगत नवाचार, सतत शासन और अनुसंधान को व्यवहार के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता है. ज्ञान आधारित निर्णय प्रक्रिया ही भारत की विकास गाथा को अगले चरण को परिभाषित करेगी. ये राय हरियाणा के मुख्य सूचना आयुक्त और पूर्व मुख्य सचिव

डॉ.टी.वी.एस.एन.प्रसाद ने व्यक्त किए.

 

वे निर्माण क्षेत्र में देश की अग्रणी निकमार यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित दो दिवसीय ९वें अंतर्राष्ट्रीय कंस्ट्रक्शन, रियल एस्टेट, इफ्रास्ट्रक्चर अँड प्रोजेक्ट मॅनेजमेंट (ICCRIP 2025) के समापन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे.

इस मौके पर यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. डॉ. सुषमा कुलकर्णी और सम्मेलन के संयोजक एवं यूनिवर्सिटी के अनुसंधान एवं विकास के डीन डॉ. रजनीकांत राजहंस उपस्थित थे.

यहां पर विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्टता को मान्यता और सम्मान भी किया गया.

डॉ. प्रसाद ने कहा, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और संसाधान दक्षता की चुनौतियों से निपटने के लिए शिक्षा जगत और उद्योग जगत से अधिक गहन सहयोग करे. वर्तमान दौर में बुनियादी ढाँचे में थ्रीडी प्रिटिंग,बिल्डिंग इन्फॉरमेशन मॉडेलिंग जैसे नए तकनीक का इस्तेमाल बडे पैमान पर हो रहा है साथ ही ड्रोन एवं रोबो का भी उपयोग किया जा रहा है. इस क्षेत्र में सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन की जरूरत है. साथ ही रिसर्च, सप्लाय चैन मैनेजमेंट, प्लॅनिंग एंड शेड्यूलिंग, सस्टेनेबल मटेरियल एंड टेक्नोलॉजी तथा डिजिटल ट्रान्सफॉर्मेशन की जरूरत समय अनुसार होना जरूरी है.

डॉ. सुषमा कुलकर्णी ने सभी प्रतिभागियों के योगदान की सराहना की और निर्माण एवं अवसंरचना क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार और सहयोग को आगे बढाने के लिए यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता पर जोर दिया.

इस वर्ष आईसीसीआरआईपी में १८ देशों के २०० से अधिक शोध पत्रों ने भाग लिया, जिसमें छह प्रमुख विषयों पर विचार विमर्श किया गया. अनुसंधान, केस स्टडी, डॉक्टरेट संगोष्ठी, व्यवसायी अंतर्दृष्टि, उद्योग प्रदर्शन और एक छात्र हैकाथॉन,

 

सम्मेलन के संयोजक एवं यूनिवर्सिटी के अनुसंधान एवं विकास के डीन डॉ. रजनीकांत राजहंस ने सम्मेलन के शानदार सफलता के लिए उद्योग और नीति निर्माताओं के सामूहिक प्रयासों पर प्रकाश डाला तथा सभी का आभार माना.

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