
बसपा ने भूमि अभिलेख विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ खोला मोर्चा
प्रदेश महासचिव डॉ. हुलगेश चलवादी का आंदोलन का अल्टीमेटम – एक माह में समाधान करें प्रशासन
पुणे :-विद्ये का माहेरघर कहलाने वाले पुणे शहर के नागरिक भूमि अभिलेख विभाग में फैले भ्रष्टाचार से त्रस्त हैं। जमीन की माप, प्रॉपर्टी कार्ड हासिल करने जैसे कार्यों के लिए नागरिकों को लगातार कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। आमजन की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए बहुजन समाज पार्टी ने आंदोलन का पवित्रा अपना लिया है। प्रदेश महासचिव, पश्चिम महाराष्ट्र ज़ोन मुख्य प्रभारी एवं पूर्व नगरसेवक डॉ. हुलगेश चलवादी ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि नागरिकों की समस्याओं का समाधान एक माह के भीतर करें, अन्यथा बसपा स्टाइल में घेराव आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने यह भी आह्वान किया कि यदि किसी नागरिक को भूमि अभिलेख कार्यालय से संबंधित समस्या या शिकायत है तो वे उनसे सीधे संपर्क करें।
डॉ. चलवादी ने कहा कि जब तक भूमि अभिलेख विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार समाप्त नहीं होगा, तब तक आम जनता का हित साध्य नहीं हो सकता। यदि हर कार्य के लिए दलालों के माध्यम से अधिकारियों को चिरौरी और रिश्वत देनी पड़े, तो प्रशासन को जनता की सेवा का ढोंग बंद कर देना चाहिए।
भूमि अभिलेख विभाग में भ्रष्टाचार, लापरवाही और दलालशाही के कारण नागरिक परेशान हैं। कार्यालय के सर्वेक्षकों द्वारा खुलकर नागरिकों को त्रास दिया जाता है। जमीन से संबंधित प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए ‘लक्ष्मीप्रसाद’ (रिश्वत) देना अनिवार्य हो गया है। योग्य सर्वेक्षक न होने से जमीन की माप और नक्शे गलत तैयार किए जाते हैं, जिससे नगररचना आराखड़े से सीमारेखाएँ मेल नहीं खातीं। धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की घटनाएँ भी बढ़ गई हैं।
डॉ. चलवादी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि फर्जी दाखिले बनाकर दूसरों के नाम पर सीमारेखाएँ दिखाई जाती हैं। एक ही जमीन का बार-बार ‘डिमार्केशन’ कर पीड़ितों को परेशान किया जाता है। एजेंटों और अधिकारियों की मिलीभगत से यह सब धंधा धड़ल्ले से जारी है। प्रॉपर्टी कार्ड में लगातार गलतियाँ की जाती हैं, जिन्हें सुधारने के लिए नागरिकों को फिर से दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। नाम, क्षेत्रफल, वारिसों के नाम जैसी मूलभूत जानकारी में अक्सर गड़बड़ की जाती है। विशेष रूप से ‘म्यूटेशन एंट्री’ के लिए नागरिकों को सालों-साल प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
साधारण व्यक्ति यदि अपनी जमीन की सीमारेखा सही कराने का प्रयास करता है, तो उसे भारी खर्च उठाना पड़ता है। न्याय की जगह उसे भ्रष्ट अधिकारियों और दलालों के जाल में और अधिक फँसाया जाता है। इस भ्रष्टाचार के कारण हजारों लोगों के घर अवैध घोषित किए जा रहे हैं और आम नागरिकों को सड़कों पर ला दिया जा रहा है। सरकार ने यदि इस ओर तत्काल ध्यान देकर कठोर कार्रवाई नहीं की, तो जनता का गुस्सा फूटना निश्चित है, ऐसा कड़ा इशारा डॉ. चलवादी ने दिया।
नागरिकों को अनधिकृत घर बनाने के लिए बाध्य किया जा रहा है!
पुणे, पिंपरी-चिंचवड़ मनपा एवं पीएमआरडीए कार्यालय से नागरिकों को नक्शा मंजूरी की इच्छा होते हुए भी भूमि अभिलेख विभाग की अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के कारण पुणेकर त्रस्त हैं। प्रॉपर्टी कार्ड, माप, ‘क’ प्रमाणपत्र हासिल करने की जटिल शर्तें, समय की बर्बादी और भ्रष्टाचार के चलते नागरिकों को मजबूरी में अनधिकृत रूप से घर बनाना पड़ रहा है। यह गंभीर आरोप भी डॉ. चलवादी ने किया। उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित न्यायाधिकरण को इस समस्या पर तुरंत ध्यान देकर समाधान करना चाहिए, अन्यथा एक माह बाद सड़क पर उतरकर बसपा स्टाइल आंदोलन किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि प्रशासन नागरिकों की शिकायतें दर्ज करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी का मोबाइल नंबर और टोल-फ्री नंबर सार्वजनिक करे।
साधारण जनता की अपील की अनदेखी
डॉ. चलवादी ने बताया कि नागरिकों की समस्याओं को लेकर अधिकारियों के पास की गई अपील केवल आर्थिक निकषों पर तय की जाती है। तकनीकी और गुणवत्ता आधारित समाधान को दरकिनार किया जाता है। अपील का निपटारा योग्यता और तथ्य के आधार पर नहीं, बल्कि पैसों के आधार पर किया जाता है। कई गुणात्मक अपीलों को कचरे की टोकरी में फेंक दिया जाता है। यह रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और आम जनता के साथ खुला अन्याय है।



