
कैनवास पर उकेरी देवी अहिल्या कि शिवभक्ति और 100 साल पुराना महाकुंभ
दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा 6 दिवसीय आलेख्य चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ
पुणे, विशाल समाचार
दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा बाल गंधर्व आर्ट गैलरी, पुणे में आयोजित 6 दिवसीय चित्र प्रदर्शनी “आलेख्य” का शुभारंभ हुआ । यह प्रदर्शनी 22 सितंबर तक चलेगी।

यह प्रदर्शनी पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर के जन्म त्रिशताब्दी वर्ष और महाकुंभ की भव्यता को समर्पित है। प्रदर्शनी में देशभर के विभिन्न कलाकारों की कृतियों ने भारतीय संस्कृति, परंपरा और इतिहास को सजीव रूप में प्रस्तुत किया।

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि आईसीसीआर सब सेंटर पुणे के निदेशक सुदर्शन शेट्टी व दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के सहायक निदेशक ( कार्यक्रम ) दीपक कुलकर्णी ,वरिष्ठ रंगमंच कलाकार सतीश इंदापुरकरउपस्थित थे । देशभर से इस विषय पर करीब 200 कलाकारों 53-पेंटिंग को चुनकर प्रदर्शनी में शामिल किया गया है। दोनों विषयों पर बने चित्रों में भारतीय संस्कृति, इतिहास और परंपरा की झलक नजर आ रही है।
दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, नागपुर की निदेशक श्रीमती आस्था कार्लेकर ने बताया कि कलाकारों ने देवी अहिल्या की शिव भक्ति से लेकर महिलाओं को शिक्षित करने के उनके प्रयास तक को कैनवास पर उतारा है। ये सभी कलाकृतियां रायपुर में हुई एक वर्कशॉप में कलाकारों ने तैयार की है, जिसे संस्कार भारती के साथ मिलकर आयोजित किया गया था। कैनवास पर एक चित्र में देवी अहिल्या बाई होलकर माहेश्वरी साड़ी हैंडलूम के साथ नजर आ रही हैं। एक चित्र में कलाकार ने सती प्रथा का विरोध दिखाया गया है, तो एक चित्र में वे घाट पर शिवलिंग हाथों में थामे नजर आ रही हैं। कुंभ में बनाए गए कलाग्राम में कई कलाकारों ने कलाकृतियां बनाई है। यहां साधना करते साधु से लेकर कुंभ की अपार भीड़ को कैनवास पर अलग अलग कलाकारों ने उतारा है। कुंभ के चित्रों को देखकर लग रहा है मानो यहां खड़े खड़े कुंभ नगरी प्रयागराज पहुंच गए हो।

इस प्रदर्शनी को कला प्रेमियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने बड़ी संख्या में देखा। कला वीथिका में दर्शकों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही। चित्रों के माध्यम से दर्शकों ने पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर के त्याग, सेवा और जनकल्याण के कार्यों के साथ-साथ महाकुंभ की अद्भुत सांस्कृतिक और आध्यात्मिक छटा का अनुभव किया।



