
आंतरराष्ट्रीय पाली भाषा दिवस : अनागरिक धम्मपाल बौद्ध परंपरा के दीपस्तंभ – डॉ. सिद्धार्थ धेंडे
पुणे: बौद्ध धम्म प्रसारक एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान अनागरिक धम्मपाल (श्रीलंका) की 161वीं जयंती के अवसर पर आज पुणे के येरवडा नागपूरचाळ स्थित त्रिरत्न विहार में पद्मपाणि फाउंडेशन की ओर से आंतरराष्ट्रीय पाली भाषा दिवस मनाया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व उपमहापौर डॉ. सिद्धार्थ धेंडे ने की।
अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. धेंडे ने कहा कि अनागरिक धम्मपाल श्रीलंका से भारत आए और आजीवन भगवान बुद्ध के विचारों को आगे ले जाने के लिए भारत में कार्यरत रहे। उन्होंने यह महत्वपूर्ण विचार समाज में स्थापित किया कि भगवान बुद्ध की जन्मभूमि बौद्धों के अधीन होनी चाहिए। इसी कारण आज उनकी जयंती पूरे देश में पाली भाषा दिवस के रूप में मनाई जा रही है।
इस अवसर पर पाली भाषा के महत्व पर विशेष अभिवादन सभा आयोजित की गई। पद्मपाणि फाउंडेशन के राहुल डंबाळे ने धम्मपाल के जीवनकार्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे बौद्ध धम्म आंदोलन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ थे। करीब 130 वर्ष पूर्व उन्होंने बोधगया बुद्ध विहार महामुक्ति आंदोलन की नींव रखी थी और वही इसके प्रणेता रहे। पाली भाषा के संरक्षण और संवर्धन में धम्मपाल का योगदान अद्वितीय है, इसी कारण वे बौद्ध परंपरा में सदैव दीपस्तंभ बने रहेंगे।
इस दौरान अनागरिक धम्मपाल जयंती के उपलक्ष्य में पाली भाषा संरक्षण हेतु विभिन्न उपक्रमों की भी जानकारी दी गई।


