पूणे

पांचवीं औद्योगिक क्रांति में ‘जीनोमिक्स’ का होगा विशेष महत्व – डॉ. शां. ब. मुजुमदार

पांचवीं औद्योगिक क्रांति में ‘जीनोमिक्स’ का होगा विशेष महत्व – डॉ. शां. ब. मुजुमदार

 

डॉ. संजय गुप्ते और डॉ. अविनाश भोंडवे लिखित ‘जीनोमिक्स’ पुस्तक का लोकार्पण

 

पुणे, :वर्तमान समय में प्रारंभ हो चुकी पांचवीं औद्योगिक क्रांति में ‘जीनोमिक्स’ का महत्व असाधारण होने वाला है। यह विचार सिंबायोसिस के कुलपति, पद्मभूषण डॉ. शां. ब. मुजुमदार ने व्यक्त किए।

 

वे ‘जीनोमिक्स – मानवीय जीवन के अंतरंग का उद्घाटन’ इस पुस्तक के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे। यह पुस्तक प्रसिद्ध स्त्रीरोग एवं प्रसूति विशेषज्ञ डॉ. संजय गुप्ते और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (महाराष्ट्र) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अविनाश भोंडवे द्वारा लिखी गई है तथा रोहन प्रकाशन से प्रकाशित की गई है। लोकार्पण समारोह का आयोजन रोहन प्रकाशन और अस्मिता फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में पुणे स्थित सिंबायोसिस, विश्वभवन (सेनापति बापट रोड) में संपन्न हुआ।

 

समारोह की अध्यक्षता डॉ. मुजुमदार ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री डॉ. रमण गंगाखेडकर उपस्थित थे। मंच पर लेखकगण डॉ. संजय गुप्ते और डॉ. अविनाश भोंडवे, रोहन प्रकाशन के संचालक रोहन चंपानेरकर और डॉ. अस्मिता गुप्ते भी मौजूद थे।

 

डॉ. मुजुमदार ने कहा कि विकसित देशों, विशेषकर अमेरिका में, जीनोमिक्स पर बड़े पैमाने पर शोध जारी है। जीनोमिक्स और मानव का गहरा संबंध है। इसके माध्यम से न केवल भविष्य में होने वाले रोगों की पहचान संभव है, बल्कि उनके लिए नई औषधि और उपचार पद्धति भी विकसित की जा सकती है। यही कारण है कि आने वाले समय में जीनोमिक्स पांचवीं औद्योगिक क्रांति का केंद्रीय आधार होगा।

 

डॉ. रमण गंगाखेडकर ने भी इस मत का समर्थन करते हुए कहा कि भारत जैसे विकासशील देश के लिए जीनोमिक्स का ज्ञान और भी महत्वपूर्ण है और भविष्य में इसकी भूमिका निरंतर बढ़ेगी।

 

जीनोमिक्स की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए डॉ. संजय गुप्ते ने बताया कि “मानव और चिंपैंजी के 99% जीन्स समान हैं। बिल्ली और मनुष्य में 90%, मक्खी में 65% तथा केले में 60% जीन्स मनुष्य से मेल खाते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि प्राणीशास्त्र और वनस्पति शास्त्र का गहरा नाता है।” उन्होंने कहा कि भविष्य में करियर चयन, खेलों में प्रदर्शन और स्वास्थ्य-आहार संबंधी निर्णयों में भी जीनोमिक्स की उपयोगिता बढ़ेगी। यहां तक कि व्यक्ति के लिए कौन-सा व्यायाम किस समय अधिक प्रभावकारी होगा, यह भी जेनेटिक टेस्टिंग से जाना जा सकता है।

 

डॉ. अविनाश भोंडवे ने कहा कि जीनोमिक्स एक ऐसा विज्ञान है जिसने अनेक रहस्य उजागर किए हैं और यह मानो एक फैंटेसी की तरह प्रतीत होता है। आने वाले समय में इसका प्रसार निश्चित रूप से बढ़ेगा।

 

पुस्तक प्रकाशन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए रोहन चंपानेरकर ने कहा कि जीनोमिक्स विषयक यह कृति समाज में वैज्ञानिक चेतना और जिज्ञासा को बढ़ावा देगी।कार्यक्रम का संचालन डॉ. मंदार परांजपे ने किया।

 

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