मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज, जनता की आवाज़ दो महीने से अनसुनी
लखनऊ/इटावा विशाल समाचार:
सरकार चाहे कितने भी दावे कर ले कि वह जनता की सुन रही है और पारदर्शी शासन दे रही है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है। दो महीने तक जनता की आवाज़ लगातार अनसुनी की जाती रही, और यह अनदेखी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक जा पहुँची।
शिकायतकर्ता ने 11 जुलाई 2025 और 3 सितंबर 2025 को दो बार स्पीड पोस्ट के ज़रिए अपनी शिकायत भेजी। इसके बावजूद शिकायत न तो आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज हुई और न ही किसी अधिकारी ने जवाब देना ज़रूरी समझा। स्थिति यह रही कि दो बार विशाल समाचार ने इस मुद्दे को अखबार और पोर्टल दोनों पर प्रमुखता से उठाया, इसके बाद भी चुप्पी ही बनी रही। यहाँ तक कि शिकायतकर्ता ने ईमेल से भी अनुरोध किया, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात।
आख़िरकार आज शिकायत पोर्टल पर दर्ज हुई। शिकायत का संदर्भ संख्या 12161250193619 है, जिसे जनसुनवाई पोर्टल/एप पर देखा जा सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कार्रवाई कब तक होगी और क्या वाकई निष्पक्ष जांच होगी, या फिर यह शिकायत भी केवल कागज़ी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी।
शिकायतकर्ता का कहना है कि बार-बार फोन करने पर भी कोई जवाब नहीं मिला। इससे साफ़ है कि प्रशासन न तो जवाबदेह नज़र आता है और न ही संवेदनशील। जब शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँचकर भी अनसुनी रह जाए, तो जनता किस पर भरोसा करे?
विशाल समाचार का मानना है कि यह सिर्फ़ एक शिकायत का मामला नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल है। अगर आम नागरिक की शिकायत महीनों तक दबा दी जाए और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ़ पोर्टल पर एंट्री दिखा दी जाए, तो फिर यह जनसुनवाई व्यवस्था किस काम की?
जनता अब उम्मीद लगाए बैठी है कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस बार शिकायत को गंभीरता से ले और वास्तविक कार्रवाई सुनिश्चित करे, वरना जनता का भरोसा एक बार फिर टूट जाएगा।


