पूणे

नागरिकों के स्वास्थ्य पर खतरा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए – डॉ. हुलगेश चलवादी

नागरिकों के स्वास्थ्य पर खतरा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए – डॉ. हुलगेश चलवादी

 

पुणे:सण-त्योहार के मौसम में दूध, मिठाई, पनीर, घी, सूखे मेवे सहित विभिन्न खाद्य पदार्थों और आम लोगों तक पहुंचने वाले खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट चिंता का विषय बन गई है। यह मिलावट केवल लाभ कमाने का साधन नहीं बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य पर किया गया खुला हमला है।

 

इस मामले में बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव, पश्चिम महाराष्ट्र झोन मुख्य प्रभारी और पूर्व नगरसेवक डॉ. हुलगेश चलवादी ने कहा कि नागरिकों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने वाले मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। अगर खाद्य एवं औषध प्रशासन आक्रामक कदम नहीं उठाता, तो बसपा कार्यकर्ता इन मिलावटखोरों को छोडने वाले नहीं हैं, इसका भी उन्होंने साफ इशारा दिया।

 

डॉ. चलवादी ने बताया कि दूध, मिठाई और पनीर में मिलावट करना समाज के स्वास्थ्य के साथ गद्दारी के समान है। दूध में डिटर्जेंट, यूरिया, कॉस्टिक सोडा, स्टार्च, फॉर्मेलिन, कृत्रिम दूध और रंगद्रव्य डालकर मिलावट की जाती है। यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। मिलावट करने वाले समाजविघातक तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना प्रशासन का नैतिक और कानूनी कर्तव्य है।

 

उन्होंने प्रशासन से अपील की कि नगर और ग्रामीण क्षेत्र में, बाजारों और छोटे दुकानों में लगातार निरीक्षण कर मिलावट रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएँ।

 

डॉ. चलवादी ने कहा कि खोटे लेबल वाले निकृष्ट दर्जे के मिठाई, कृत्रिम रंगयुक्त पनीर और रासायनिक मिश्रित घी बाजार में बिक रहे हैं। इससे लोगों को अपच, एसिडिटी, त्वचा रोग, जिगर और किडनी संबंधी विकार होते हैं, और कई बार यह मामला मृत्यु तक पहुंच सकता है। इसके बावजूद प्रशासन क्यों निष्क्रिय है, यह उन्होंने संतप्त स्वर में पूछा।

 

उन्होंने यह भी कहा कि मिलावट करने वाली कंपनियों और दुकानदारों के नाम सार्वजनिक किए जाएँ और उन पर फौजदारी अपराध दर्ज किए जाएँ। केवल दंड और नोटिस देकर उन्हें छोड़ा जाना मिलावटखोरों को संरक्षण देने जैसा है।

 

डॉ. चलवादी ने नागरिकों से अपील की कि वे केवल प्रशासन पर निर्भर न रहें बल्कि अपने स्वास्थ्य की जिम्मेदारी स्वयं उठाएँ। मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थ खरीदते समय उनकी गुणवत्ता जांचें और किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत खाद्य एवं औषध प्रशासन में शिकायत दर्ज करें।

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