कांग्रेस प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी का वक्तव्य
“यदि न्याय देवता के प्रति आस्था है, तो धर्मांध राकेश किशोर पर ‘अत्याचार निवारण अधिनियम’ के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर, न्याय व्यवस्था के प्रति सम्मान सिद्ध करें”
Reported by Vishal Sharmachar Web Desk | Pune Bureau
पुणे, ‘सनातन धर्म’ का नाम लेकर जातीय एवं धर्मांध मानसिकता से प्रेरित व्यक्ति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में देश के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने का जो निंदनीय प्रयास किया गया, वह भारत की संवैधानिक न्याय व्यवस्था पर सीधा आघात है। इस प्रकरण की तीव्र निंदा करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ राज्य प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री केवल ट्वीट या फोन के माध्यम से निषेध व्यक्त कर थम न जाएँ, बल्कि इस कृत्य को गंभीरता से लेते हुए दोषी राकेश किशोर के विरुद्ध ‘अत्याचार निवारण अधिनियम’ के अंतर्गत आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
अपने वक्तव्य में गोपालदादा तिवारी ने कहा कि 450 वर्षों से लंबित ‘राम मंदिर–बाबरी मस्जिद’ विवाद का समाधान स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक न्याय प्रणाली के माध्यम से शांतिपूर्ण एवं विधिक तरीके से संभव हुआ, यह हमारे संविधान और न्याय व्यवस्था की गरिमा का परिचायक है।
उन्होंने आगे कहा कि ‘सनातन धर्म’ का नाम लेकर विकृत मानसिकता से प्रेरित कुछ प्रवृत्तियाँ जब न्यायालय पर आक्रमण करती हैं, तो यह स्पष्ट संकेत है कि वे भारत की लोकतांत्रिक भावना और संविधान के मूल सिद्धांतों के प्रति अनादर रखती हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था के प्रति वास्तविक सम्मान शब्दों से नहीं, बल्कि ठोस कार्यवाही से सिद्ध होता है। इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि वह न्यायिक गरिमा की रक्षा हेतु तत्परता से कदम उठाए।
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