पूणे

नव विकसित तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी को इतिहास सिखाना संभव — नगरविकास राज्यमंत्री माधुरी मिसाळ

नव विकसित तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी को इतिहास सिखाना संभव — नगरविकास राज्यमंत्री माधुरी मिसाळ

शिवसृष्टि परियोजना अंतर्गत नवले पुल के समीप स्थापित शिवकालीन समूह शिल्प का लोकार्पण

 

पुणे, नव विकसित हो रही तकनीकों के माध्यम से नई पीढ़ी को इतिहास सिखाना संभव है तथा इसका उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है। यह विचार महाराष्ट्र राज्य की नगरविकास राज्यमंत्री श्रीमती माधुरी मिसाळ ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इन अत्याधुनिक साधनों के उपयोग से इतिहास को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है। आंबेगांव बुद्रुक स्थित निर्माणाधीन शिवसृष्टि परियोजना इसका उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ पुणे और आसपास के नागरिकों को मराठा इतिहास का सजीव अनुभव प्राप्त हो रहा है।

 

शिवसृष्टि परियोजना के अंतर्गत पुणे महानगरपालिका और भारतीय राजमार्ग प्राधिकरण के सहयोग से मुंबई–बेंगलुरु राजमार्ग पर नवले पुल के समीप निर्मित शिवकालीन समूह शिल्प का लोकार्पण आज राज्यमंत्री श्रीमती माधुरी मिसाळ के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ।

 

इस अवसर पर खडकवासला विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री भीमराव तापकीर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुणे महानगर कार्यवाह श्री सचिन भोसले, गारवे समूह के संचालक श्री किशोर गारवे, शिवसृष्टि के अध्यक्ष श्री जगदीश कदम, विश्वस्त श्री विनीत कुबेर, श्री सुनील मुतालिक, श्री अमृत पुरंदरे, सलाहकार श्री मनोज पोचट, तथा प्रशासकीय अधिकारी श्री अनिल पवार उपस्थित रहे।

 

आज लोकार्पित किया गया शिवकालीन समूह शिल्प 15 फुट लंबा, 15 फुट चौड़ा तथा 25 फुट ऊँचा है। यह शिल्प सत्रहवीं शताब्दी की युद्धभूमि का सजीव दृश्य प्रस्तुत करता है। इसके पायथ्य पर घुड़सवार, शीर्ष पर झंडा रोपता हुआ मावला, तथा तलवार, ढाल और भाला धारण किए हुए योद्धा अंकित किए गए हैं। प्रत्येक मूर्ति की मुद्राएँ, भाव और घोड़ों की जीवंत आकृतियाँ इस समूह शिल्प की विशेषता हैं।

इस भव्य शिल्पकृति का निर्माण सुप्रसिद्ध शिल्पकार श्री दीपक थोपटे ने किया है। लोकार्पण के पश्चात् उनका सम्मान भी किया गया। इस समूह शिल्प के निर्माण हेतु गारवे समूह के श्री किशोर गारवे और श्री विनायक गारवे ने आर्थिक सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर शिवसृष्टि ट्रस्ट की ओर से श्री किशोर गारवे का भी सम्मान किया गया।

 

राज्यमंत्री श्रीमती माधुरी मिसाळ ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज तकनीकी क्षेत्र में तीव्र परिवर्तन हो रहे हैं — कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), वर्चुअल रियलिटी (वीआर) जैसी तकनीकें तीव्र गति से विकसित हो रही हैं। युवा पीढ़ी का इनकी ओर आकर्षण स्वाभाविक है। यदि इन तकनीकों का समुचित उपयोग किया जाए तो नई पीढ़ी को इतिहास अधिक प्रभावी और रोचक ढंग से सिखाया जा सकता है।

 

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए किलों पर पुनर्बांधणी, प्रकाश योजना, सूचना फलक तथा आधारभूत सुविधाओं के विकास हेतु करोड़ों रुपये की निधि प्रदान की है। इस कार्य में स्थानीय नागरिकों की सहभागिता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उन्होंने आगे कहा कि “मराठी अस्मिता” और “वैश्विक धरोहर” के मध्य सेतु स्थापित करने के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है। यूनेस्को की मान्यता से छत्रपति शिवाजी महाराज का गौरव विश्व पटल पर और अधिक प्रतिष्ठित होगा।

 

शिवसृष्टि नई पीढ़ी को छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन और चरित्र प्रभावी ढंग से समझाने में सहायक सिद्ध होगी। इस परिसर में किले, दुर्ग, वास्तुकला, युद्धदृश्य और दृश्य-प्रदर्शन में थ्री-डी, फोर-डी मॉडल शो तथा विज़ुअलाइज़ेशन जैसी नवीन तकनीकों का उपयोग किया गया है।

विधायक श्री भीमराव तापकीर ने कहा कि “छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे आदर्श हैं; अतः युवाओं को उनके कार्यों का अनुभव प्राप्त करने के लिए शिवसृष्टि का अवश्य भ्रमण करना चाहिए।”

 

शिवसृष्टि के अध्यक्ष श्री जगदीश कदम ने बताया कि आगामी दो वर्षों में परियोजना के तृतीय और चतुर्थ चरण का कार्य पूर्ण करने की योजना है। नवीन तकनीक के उपयोग से रायगढ़ की राजसभा तथा शिवराज्याभिषेक समारोह को साकार रूप देने का कार्य वर्तमान में प्रगति पर है।

कार्यक्रम का संचालन श्री अजित आपटे ने किया और आभार प्रदर्शन श्री विनीत कुबेर ने किया।

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